प्रदेश भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. देवेंद्र प्रधान के निधन पर प्रधान मंत्री और कई मान्य गण नेताओ ने शोक व्यक्त किया

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भुवनेश्वर, 17/03: प्रख्यात राजनीतिज्ञ, पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. देवेंद्र प्रधान का 83 वर्ष की आयु में दिल्ली में निधन हो गया। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी श्रधांजलि देने हॉस्पिटल पहुंचे,
डॉ. प्रधान लंबे समय से उम्र से संबंधित बीमारियों से पीड़ित थे। उनका निधन देश और पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति है।

स्वर्गीय डॉ. प्रधान का जन्म 16 जुलाई 1941 को हुआ था। 1966 में एससीबी मेडिकल कॉलेज, कटक से एमबीबीएस की डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने तालचेर में डॉक्टर के रूप में काम किया। 1980 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने एक सशक्त संगठनकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने वाजपेयी सरकार में दो बार केंद्रीय मंत्री, तीन बार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश महासचिव के रूप में अपना प्रदर्शन प्रदर्शित किया। स्वर्गीय डॉ. प्रधान भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के सदस्य थे और उन्होंने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में उनकी भूमिका अद्वितीय है। डॉ. प्रधान एक महान चरित्र के व्यक्ति थे और समाज एवं संगठन में सभी लोग उनसे प्रेम करते थे।

उनकी दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए भगवान श्री जगन्नाथ जी से प्रार्थना की कि वे दुख की इस घड़ी में उनके शोक संतप्त परिवार और मित्रों को असीम धैर्य प्रदान करें।

मनोज कुमार त्रिपाठी
स्टेट हेड, ओडिशा
प्लानेट न्यूज़ इंडिया

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Author: planetnewsindia

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संजय भाटिया ने लोकसभा चुनाव में रचा था इतिहास संजय भाटिया कुरुक्षेत्र विश्वविद्याल ग्रेजुएट हैं। इनका जन्म हरियाणा के पानीपत जिले में हुआ है। वह भाजपा के महामंत्री भी रह चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी संजय भाटिया ने अपने पहले ही लोकसभा चुनाव में इतिहास रच दिया था। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 6.54 लाख मतों के अंतर से मात दी थी। संजय भाटिया ने प्रदेश के 53 साल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 909432 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप शर्मा को 654269 वोटों के अंतर से हराया था। राहुल गांधी ने दिया था कर्मवीर के नाम का सुझाव वहीं कर्मवीर सिंह बौद्ध किसी भी गुट या खेमे से जुड़े हुए नेता नहीं माने जाते। यही कारण है कि उन्हें संगठन के भीतर एक संतुलित और सर्व स्वीकार्य चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। वे ‘संविधान बचाओ अभियान’ में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते रहे हैं। एससी समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध सामाजिक संतुलन के नजरिये से भी एक अहम दावेदार है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्वयं उनके नाम का सुझाव दिया है। अंबाला के मुलाना विधानसभा में रहने वाले कर्मवीर सिंह प्रशासकीय अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़कर कार्य कर रहे थे। कांग्रेस ने उन्हें हिमाचल प्रदेश में एससी सेल का प्रभारी भी बनाया था। राष्ट्रीय स्तर पर वह कन्वीनर भी हैं।