Chandrayaan-5: चंद्रयान के तीसरे चरण से कितना अलग चंद्रयान-5, कैसे चांद पर इंसानों को भेजने का आधार बनेगा?

Picture of planetnewsindia

planetnewsindia

SHARE:

चंद्रयान-5 मिशन क्या है? इसे लेकर इसरो ने अब तक क्या तैयारी कर ली है? भारत इस मिशन से क्या हासिल करना चाहता है? चंद्रयान-5 की खासियत क्या होगी और यह चांद पर भेजे गए चंद्रयान-3 मिशन से कितना अलग होगा? आइये जानते हैं…

Chandrayaan 5 LUPEX Mission Approved Union Government ISRO Japan JAXA Joint Mission Rover Lander explained

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर रोवर उतार कर भारत पहले ही इतिहास रच चुका है। जहां अब तक दुनियाभर के देश भारत के इस कारनामे को दोहराने के लिए कोशिशों में जुटी है, वहीं इसरो अब चांद के लिए अपने नए मिशन्स की तैयारी में जुटा है। केंद्र सरकार ने इसी कड़ी में रविवार को भारत के चंद्रयान-5 मिशन को मंजूरी दे दी है। चंद्रयान-4 के बाद चंद्रयान-5 मिशन को 2028-29 तक लॉन्च किया जा सकता है। हालांकि, इसकी तारीख का एलान आने वाले चरणों के पूरा होने के बाद किया जाएगा।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर चंद्रयान-5 मिशन क्या है? इसे लेकर इसरो ने अब तक क्या तैयारी कर ली है? भारत इस मिशन से क्या हासिल करना चाहता है? चंद्रयान-5 की खासियत क्या होगी और यह चांद पर भेजे गए चंद्रयान-3 मिशन से कितना अलग होगा? आइये जानते हैं…
पहले जानें- चंद्रयान-3 मिशन में भारत ने क्या अर्जित किया?
चंद्रयान-3 मिशन को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बंगलूरू से लॉन्च किया था। इसके विक्रम लैंडर ने 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सुरक्षित और सफल सॉफ्ट लैंडिंग की। चांद की सतह पर सुरक्षित लैंड करने वाला अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चौथा देश बना था, जबकि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश बन गया। सॉफ्ट लैंडिंग के बाद प्रज्ञान रोवर की सफल तैनाती की गई। इस लैंडिंग स्थल को तीन दिन बाद 26 अगस्त को ‘शिव शक्ति प्वाइंट’ नाम दिया गया था।

चंद्रयान-3 मिशन चंद्रयान-2 का ही अगला चरण था, जिसे चंद्रमा की सतह पर उतरकर परीक्षण करने के लिए तैयार किया गया था। इसमें एक लैंडर और एक रोवर शामिल किए गए। विक्रम लैंडर में ChaSTE नाम का उपकरण लगाया गया था, जिसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह की तापीय चालकता का अध्ययन करना था। इसके साथ ही उपकरण ने चंद्रमा की सतह पर और नीचे अलग-अलग जगहों पर तापमान में अंतर को भी मापा।

ChaSTE उपकरण ने चांद के दक्षिणी ध्रुव के बारे में इसरो को एक अहम जानकारी दी। खासकर यहां के तापमान और अगर अंतरिक्ष यात्री वहां जाते हैं तो किस प्रकार का माहौल मिलेगा और वे क्या-क्या सामग्री उपयोग में ला सकता हैं। इतना ही नहीं SHAPE पेलोड ने दो महीने तक चंद्रमा की परिक्रमा करने वाले प्लेटफॉर्म से पृथ्वी का निरीक्षण किया। इसमें ऑक्सीजन, जल वाष्प और कार्बन-डाई-ऑक्साइड की मौजूदगी दिखाई देती है, जो एक ऐसे ग्रह का संकेत देती है जो जीवन के लिए रहने योग्य है। इतना ही नहीं चंद्रयान-3 मिशन में चांद पर कई तत्वों की मौजूदगी का भी पता लगा।

चंद्रयान-5 मिशन क्या है, इससे क्या हासिल करना चाहता है इसरो?
चंद्रयान-5 भारत की अंतरिक्ष एजेंसी- इसरो और जापान की अंतरिक्ष एजेंसी- जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) का साझा कार्यक्रम होगा। इसे लूनर पोलर एक्स्पोरेशन यानी ल्यूपेक्स (LUPEX) मिशन नाम दिया गया है।
चंद्रयान-5 मिशन को जापान और भारत की तरफ से मिलकर पूरा किया जाएगा। इस मिशन की सबसे खास बात होगी इसका 250 किलोग्राम का रोवर, जो कि चंद्रयान के प्रज्ञान रोवर के मुकाबले 10 गुना भारी होगा। इस भारी वजन की वजह होगी रोवर में मौजूद अत्याधुनिक और ज्यादा से ज्यादा तकनीक की मौजूदगी, जो कि चंद्रयान-5 मिशन को दक्षिण ध्रुव की स्टडी के लिए अहम बना देगा।

इतना ही नहीं भारी रोवर की वजह से भारत की तरफ से बनाया जा रहा लैंडर भी वजन भी भारी रखा जाएगा। जहां चंद्रयान-3 के लैंडर का वजन 2 टन से थोड़ा कम रखा गया था, वहीं चंद्रयान-5 के लैंडर का वजन करीब 26 टन रखा जा सकता है। दरअसल, लैंडर के हल्के रहने पर इसके ऊबड़-खाबड़ सतह पर ठीक से न लैंड होने की आशंका रहती है। लेकिन भारी वजन की वजह से लैंडिंग में संतुलन बना रहेगा।

इसरो की फिजिकल रिसर्च लैब के निदेशक अनिल भारद्वाज ने कुछ समय पहले ही एक मीडिया समूह को बताया था कि दक्षिणी ध्रुव पर इस मिशन को उतारने का मकसद इस क्षेत्र में बसावट को जांचना रहेगा। दरअसल, चांद का यह क्षेत्र लगातार अंधेरे में ही रहता है, जिससे यहां तापमान माइनस में चला जाता है। ऐसे में यहां माहौल किस हद तक खराब हो सकता है और इसकी सतह पर बर्फ और पानी मिलने की संभावना कितनी है, इसका पता लगाया जाएगा।

भारद्वाज ने बताया कि चंद्रयान-5 मिशन में इसरो द्वारा निर्मित लैंडर में आधुनिक वैज्ञानिक उपकरण लगाए जाएंगे। इसका वजन करीब 26,000 किलोग्राम तक सीमित करने का लक्ष्य रखा गया है। लैंडर में ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार, जो कि चांद की सतह के कई फीट नीचे तक का पूरा ब्योरा दे सके, उसे लगाया जाएगा। इसके अलावा मिड-इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर और रमन स्पेक्ट्रोमीटर भी लैंडर का ही हिस्सा होंगे। यह दोनों उपकरण चांद की सतह की बनावट का परीक्षण करेंगे और इससे चांद पर पानी की मौजूदगी का ज्यादा बेहतर प्रमाण मुहैया कराएंगे।

इसके अलावा लैंडर का पेलोड- परमिटिविटी एंड थर्मोफिजिकल इन्वेस्टिगेशन फॉर मून्स एक्वेटिक स्काउट (PRATHIMA) चांद के आसपास के तापमान और यहां पानी की मौजूदगी की संभावना की पूरी जानकारी इकट्ठा करेगा। इसके अलावा लैंडर में जापान के सेंसर्स को भी लगाया जाएगा, जिससे चांद की सतह की गहराई को समझने में मदद मिलेगी।

चंद्रयान-5 मिशन के दूरगामी परिणाम क्या होंगे?
इसरो के लैंडर में चंद्रयान-3 और चंद्रयान-4 से अलग नया और भारी इंजन का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा इसकी कार्य अवधि को बढ़ाने के लिए बड़ा फ्यूल टैंक (सोलर पैनल्स और बैट्री), कंट्रोल सिस्टम और लैंडिंग गियर लगाए जाएंगे। इससे चंद्रयान-5 मिशन पुराने सभी मिशन्स से ज्यादा लंबे समय तक काम करेगा।

इतना ही नहीं भारी लैंडर सिस्टम को बेहतर थर्मल सिस्टम से लैस किया जाएगा, जो कि दक्षिणी ध्रुव के दिन के बेहद गर्म 127 डिग्री सेल्सियस तापमान और रात के बेहद ठंडे तापमान माइनल 173 डिग्री सेल्सियस में भी पूरे मिशन को सुरक्षित रख सकेगा। इसका मतलब यह होगा कि चंद्रयान-5 मिशन सिर्फ दक्षिणी ध्रुव पर सूर्य की रोशनी पड़ने के दौरान ही काम नहीं करेगा, बल्कि अंधेरे और भीषण ठंड के अगले 14 दिनों में भी भारत-जापान का साझा मिशन अहम

तो क्या चांद पर इंसानों को भेजने का रास्ता साफ होगा?
गौरतलब है कि चांद पर इंसान को भेजने का कारनामा अब तक सिर्फ अमेरिका ही कर पाया है। हालांकि, उसके अपोलो मिशन्स को अब 50 साल से ज्यादा हो चुके हैं। जहां, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा इस दशक के अंत तक या अगले 2030 के पहले ही कुछ वर्षों में ही अपने मानव मिशन को चांद पर उतारने की तैयारी कर रहा है, तो वहीं चीन, यूरोप और अब भारत-जापान भी चांद पर इंसानों को भेजने की तैयारी में जुट गए हैं।

भारत का चंद्रयान-5 मिशन इसी कड़ी में बेहद अहम है। पिछले साल इसरो के तत्कालीन प्रमुख एस. सोमनाथ ने बताया था कि चंद्रयान-5 के लैंडर के लिए इसरो का लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (एलपीएससी) जो बड़ा इंजन तैयार कर रहा है, वह इस क्षमता के हिसाब से होगा कि इसकी तर्ज पर चांद पर इंसानों को उतारने लायक चंद्रयान तैयार किया जा सकेगा। इतना ही नहीं चंद्रयान-5 के लैंडर में जो व्यवस्थाएं की जाएंगी, उन फीचर्स को इंसानों को ले जाने के मिशन्स में भी शामिल किया जाएगा। इस लिहाज से चंद्रयान-5 मिशन भारत के चांद पर मानव मिशन की संभावनाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

planetnewsindia
Author: planetnewsindia

8006478914

सबसे ज्यादा पड़ गई