अलीगढ़ डीएम संजीव रंजन ने कहा है कि जिन उद्यमियों को भूमि की जरूरत है, उन्हें जिले के इंडस्ट्रीयल एरिया में जहां जगह है, वहां वरीयता के आधार पर भूमि दिलवाई जाएगी।

प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने के इरादे से आयोजित यूपी इंवेस्टर्स समिट में निवेश पर करार करने वाली कई कंपनियों ने जहां काम शुरू कर दिया है वहीं 3400 करोड़ वाले 43 बड़े निवेशक अपने उद्योग लगाने के लिए भूमि का इंतजार कर रहे हैं। इन्हें सरकारी या निजी स्तर पर कुल 785649 स्क्वायर मीटर भूमि (करीब 900 बीघा भूमि) की दरकार है। वहीं प्रशासन का कहना है कि जमीन उपलब्ध कराने के लिए प्रयास हो रहे हैं। जल्द ही भूमि दिलवा दी जाएगी।
इन निवेशकों के प्रोजक्ट धरातल पर लाने के लिए उद्योग विभाग को नोडल अफसर बनाया गया है। जिसके द्वारा सभी निवेशकों की विभागीय समस्याओं को दूर कर उनके प्रोजेक्ट को शुरू कराने में सहयोग करना है। लक्ष्य तय किया गया है कि मार्च 2025 तक अधिक से अधिक निवेशकों के प्रोजेक्ट शुरू करा दिए जाएं।
हमने यहां दवा निर्माण के लिए करार किया था। उम्मीद थी कि सरकारी जमीन आसान किश्तों व सस्ती कीमत में मिलेगी। मगर ऐसा नहीं हुआ। इसलिए छह माह पहले बंगलूरू में सरकारी भूमि मिलने पर अपनी नई इकाई वहां लगाई है। अगर यहां भूमि ख्यामई में विकसित हो रहे इंडस्ट्रीयल एस्टेट में मिलेगी तो अपनी इकाई लगाएंगे।-सौरभ बालजीवन, बालजीवन ग्रुप
हमने टूरिज्म क्षेत्र से अपने होटल प्रोजेक्ट के लिए करार किया था। उसके लिए निजी भूमि तलाश रहे हैं। मगर कीमत महंगी होने के कारण जमीन नहीं ले पाए। इसलिए प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया है।-निखिल अग्रवाल, मिल्कबार ग्रुप
ये वे निवेशक हैं जिन्हें उम्मीद थी कि सरकार से भूमि मिल जाएगी और वह अपनी इकाई लगा लेंगे। मगर ऐसा नहीं है। हां, हम ख्यामई में इंडस्ट्रीयल एस्टेट विकसित कर रहे हैं। मगर उसमें भी इतने लोगों को नियम शर्तों के अनुसार भूमि नहीं दे पाएंगे। इसलिए अब इन्हें खुद निर्णय लेना होगा।-वीरेंद्र सिंह संयुक्त आयुक्त उद्योग
जिन उद्यमियों को भूमि की जरूरत है, उन्हें जिले के इंडस्ट्रीयल एरिया में जहां जगह है, वहां वरीयता के आधार पर भूमि दिलवाई जाएगी। बाकी उनकी समस्याओं का भी क्रमवार समाधान कराया जाएगा। जल्द इस दिशा में ठोस कदम उठेंगे।-संजीव रंजन, डीएम
हमने टूरिज्म क्षेत्र से अपने होटल प्रोजेक्ट के लिए करार किया था। उसके लिए निजी भूमि तलाश रहे हैं। मगर कीमत महंगी होने के कारण जमीन नहीं ले पाए। इसलिए प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया है।-निखिल अग्रवाल, मिल्कबार ग्रुप
ये वे निवेशक हैं जिन्हें उम्मीद थी कि सरकार से भूमि मिल जाएगी और वह अपनी इकाई लगा लेंगे। मगर ऐसा नहीं है। हां, हम ख्यामई में इंडस्ट्रीयल एस्टेट विकसित कर रहे हैं। मगर उसमें भी इतने लोगों को नियम शर्तों के अनुसार भूमि नहीं दे पाएंगे। इसलिए अब इन्हें खुद निर्णय लेना होगा।-वीरेंद्र सिंह संयुक्त आयुक्त उद्योग
जिन उद्यमियों को भूमि की जरूरत है, उन्हें जिले के इंडस्ट्रीयल एरिया में जहां जगह है, वहां वरीयता के आधार पर भूमि दिलवाई जाएगी। बाकी उनकी समस्याओं का भी क्रमवार समाधान कराया जाएगा। जल्द इस दिशा में ठोस कदम उठेंगे।-संजीव रंजन, डीएम
ये हुए थे 55 हजार करोड़ के 496 करार
इंवेस्टर समिट में 55 हजार करोड़ रुपये के निवेश के 496 करार हुए। इनमें एमएसएमई, होर्टिकल्चर, आईटी, एक्सप्रेस वे, यूपीएसआईडीसी, स्वास्थ्य, होटल आदि क्षेत्र के करार थे।