J&K: कुख्यात अपराधी अब आतंकियों की तर्ज पर चला रहे नेटवर्क, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम से होती है बातचीत

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कुख्यात अपराधी अब आतंकियों की तर्ज पर व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और हाइब्रिड गुर्गों का इस्तेमाल करके अपराधों को अंजाम दे रहे हैं, जिससे पुलिस को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

J&K: Notorious criminals now run networks on the lines of terrorists, communicate with WhatsApp and Instagram

कुख्यात अपराधी आतंकियों की तर्ज पर अपना नेटवर्क चला रहे हैं। नशा तस्करी के लिए कोडवर्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि अन्य गतिविधियों के लिए बातचीत पूरी तरह से व्हाटसएप और इंस्टाग्राम कालिंग के जरिए कर रहे हैं। जिस तरह आतंकी किसी वारदात को अंजाम देने से पहले रेकी करते हैं, ठीक उसी तरह अपराधी अपने काम को अंजाम देने के लिए रेकी कर रहे हैं।

पहले से ही पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुके अपराधियों का ये नया पैंतरा नई चुनौती बन गया है। क्योंकि पुलिस सामान्य कॉलिंग को तो पकड़ में ले आती है। लेकिन वर्चुअल कॉल को नहीं पकड़ पा रही। इसलिए नशे के कारोबार से लेकर गैंगवार तक फल फूल रहा है। पिछले कुछ समय में पकड़े गए अपराधियों से पूछताछ में ऐसी कई जानकारियां निकल कर आई हैं। जिसे लेकर पुलिस नए सिरे से सोच रही है। क्योंकि मौजूदा समय में पुलिस का स्पेशल आपरेशन ग्रुप ही इस तरह की तकनीक का पता लगा सकता है। पुलिस की सामान्य इकाइयां नहीं।

 

नशा बेचने के लिए टॉफी, सामान जैसे कोडवर्ड 
हेरोइन बेचने वाले टॉफी, सामान जैसे कोडवर्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। नशे का सामान डिलीवर करने के लिए किसी एक खास जगह पर बुलाया जाता है। लेकिन बुलाने पर भी डिलीवरी नहीं दी जाती। इसके बाद फिर एक नई लोकेशन भेजी जाती है। इस तरह से दो से तीन लोकेशन बदलने के बाद नशे का सामान डिलीवर होता है। ऐसा इसलिए भी है कि नशा तस्कर देखते हैं कि क्या नशा लेने वाला पुलिस का मुखबिर तो नहीं। नशा बेचने वाले नए व्यक्ति की रेकी तक करा रहे हैं। कई जगहों पर तस्कर डिलीवरी के लिए वैन का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सोशल मीडिया से ही बातचीत 
अपराधी अपने लिए हथियार और पैसा जमा करने के लिए वीपीएन नंबरों का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। ठीक उसी तरह जैसे आतंकी करते हैं। विदेश से कुछ नंबरों के जरिए व्हाटसएप और इंस्टाग्राम अकाउंट बनाए गए हैं। इन्हीं अकाउंट के माध्यम से ये आपस में बात करते हैं। यहीं से अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। यहीं से इनकी यूपी और पंजाब में बैठे हैंडलरों से हथियार खरीदने और पैसा लेने की सेटिंग हो रही है।

खुद बचने के लिए हाइब्रिड गुर्गों को सुपारी 
बताते चलें कि बड़े और कुख्यात अपराधी अपनी गतिविधियों को चलाने के लिए अपने हाइब्रिड गुर्गों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनका या तो कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है या फिर बहुत कम रिकॉर्ड है । ठीक इसी तरह आतंकी संगठन भी कर चुके हैं । आतंकी भी ऐसे युवाओं का वारदात में इस्तेमाल करते थे। जिनका कोई पुलिस रिकॉर्ड नहीं था। वारदात को अंजाम देने के लिए बड़े और कुख्यात अपराधी हाइब्रिड अपराधियों को सुपारी देकर वारदात करवा रहे हैं।

कैसे 1 
गटारू हत्याकांड 
एक महीना पहले ज्वेल क्षेत्र में हुए गटारू हत्याकांड में भी हाइब्रिड गुर्गों का इस्तेमाल किया गया । खौफ गैंग के सरगना ने सुपारी देकर गटारू की हत्या करवा दी ।कैसे 2 
मीरा साहिब 
कुछ दिन पहले गिरफ्तार किए गए चार गैंगस्टरों ने पुलिस से पूछताछ में कबूल किया कि उन्हें कुख्यात बदमाशों ने प्रॉपर्टी डीलर और कुछ अन्य लोगों की हत्या करने की सुपारी दी थी। इन लोगों के पास से पुलिस ने चार पिस्तौल भी बरामद की हैं जो उत्तर प्रदेश से लेकर आए थे।

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