दिल्ली के अतिरिक्त मुख्य सचिव नवीन चौधरी का कहना है कि तीन सालों के अंदर नदी को साफ किया जाएगा। दिल्ली में यमुना का 57 किलोमीटर का हिस्सा है। यह हरियाणा से दिल्ली में प्रवेश करती है और उत्तर प्रदेश की सीमा तक पहुंच जाती है

जनवरी 2027 से यमुना में सीवरेज का गंदा पानी नहीं गिरेगा। दिसंबर 2026 तक दिल्ली में बनाए गए सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट शुरू कर दिए जाएंगे। इनकी मदद से यमुना को साफ करने में मदद मिलेगी।
दिल्ली के अतिरिक्त मुख्य सचिव नवीन चौधरी का कहना है कि तीन सालों के अंदर नदी को साफ किया जाएगा। दिल्ली में यमुना का 57 किलोमीटर का हिस्सा है। यह हरियाणा से दिल्ली में प्रवेश करती है और उत्तर प्रदेश की सीमा तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि नदी से ठोस अपशिष्ट, जलकुंभी और खरपतवार को हटाने के लिए सात मशीनें लगाई गई हैं। यह काम अगले कुछ महीनों तक चलेगा।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में लगभग एक दर्जन एसटीपी का आधुनिकीकरण किया जाना है। 2026 के अंत तक छह ऐसे संयंत्रों का निर्माण पूरा करना है। दिसंबर 2026 तक सभी एसटीपी पूरी तरह कार्यात्मक हो जाएंगे। उसके बाद यमुना में कोई अनुपचारित सीवेज गिराया गया पाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि नदी में औद्योगिक अपशिष्टों के प्रवाह को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, जिसके लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी), दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और उद्योग विभाग मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में (सीईटीपी) ठीक से काम कर रहे हैं। लोगों को मूर्तियों को विसर्जित करने, कैलेंडर आदि वस्तुओं को नदी में फेंकने से रोकने के लिए जागरूकता पैदा की जाएगी।
यमुना में गिरते हैं 30 नाले
यमुना में करीब 28 से 30 बड़े नाले अनुपचारित अपशिष्ट जल डालते हैं। सबसे बड़े नाले नजफगढ़ और बारापुला नाले हैं। इन नालों में कई छोटे नाले मिलते हैं जो अनुपचारित पानी को नदी में ले जाते हैं। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) भी फल्ड नालों के माध्यम से सीवेज के प्रवाह को रोकने के लिए काम कर रहा है।
Author: planetnewsindia
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