भारत में राष्ट्रीय महिला दिवस प्रतिवर्ष तेरह फरवरी को सरोजनी नायडू के जन्मदिन के अवसर पर मनाया जाता है। सरोजनी नायडू उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल थी, जो भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की सक्रिय नेता थीं। और अपने साहित्यिक कार्यों के लिए जानी जाती है। जिसके लिए उन्हें महात्मा गांधी द्वारा भारत कोकिला की उपाधि दी गई। प्राचीन समय से ही महिलाओं का समाज और परिवार में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। पूर्व में महिलाओं का जीवन दुख, दर्द, उपेक्षा की पटकथा प्रस्तुत करता है, जिसका पुरूष प्रधान समाज में पुरूष की इच्छापूर्ति करना व अपने दुर्भाग्य पर आंसू बहाना मात्र था।
गुरूवार को यह उद्गार सादाबाद में आदर्श महिला एव बाल कल्याण संस्था के बैनर तले जिला महामंत्री पूनम वर्मा के आवास पर राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर संस्था में उत्कृष्ठल योगदान देने के लिये महिला सम्मान समारोह में संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष रेखा राणा ने प्रकट किए। उन्होंने कहा कि समय के परिवर्तन ने नारी के श्रम, तपस्या अनवरत् प्रयत्न एवं दृढ़ संकल्प ने उसे श्रद्धा का स्वरूप बना दिया है और वह आत्म-विश्वास का प्रतिमान बनकर मानव-जीवन में अमृत तुल्य बनकर उत्कृष्ट स्थान प्राप्त किये हुए हैं। वही संस्था की महामंत्री पूनम वर्मा ने कहा कि नारी सृजन और ममता की प्रतिमूर्ति है, जब आत्मनिर्भर और सशक्त बनती है, तो वह न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज को सकारात्मक दिशा देती है। महिलाओं का शिक्षित होना सशक्तिकरण का पहला एवं अन्तिम कदम है। आधुनिक युग में महिलायें पुरूषों से अधिक सशक्त हैं। शिक्षा से उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हुयी हैं। इस दौरान श्यामू देवी, पूनम वर्मा , राखी देवी, उषा देवी, मंजू देवी, ज्योति देवी,पूनम राघव सहित अन्य महिला पदाधिकारियों को संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा सम्मानित किया गया। इस दौरान संस्था की सभी पदाधिकारी एवं सदस्यायें मौजूद थीं।
Author: Sunil Kumar
SASNI, HATHRAS