पंडित दीनदयाल जी ने राष्ट्र निर्माण और भविष्य की संकल्पना को लेकर गहन चिंतन किया, जिसमें भारतीय संस्कृति और परंपरा के अनुरूप राष्ट्र की चित्ति से विराट तक की कल्पना थी। उनके विकास का आधार एकात्म मानव दर्शन है। इसमें संपूर्ण जीवन की रचनात्मक दृष्टि समाहित है। उन्होंने विकास की दिशा को भारतीय संस्कृति के एकात्म मानवदर्शन के मूल में खोजा।
यह बिचार गांव सिंघर्र में पं. दीनदयाल उपाध्याय की सत्तावन वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्रक्रम के दौरान भुवनेन्द्र सिंह तोमर एवं उनके भतीजे शुभम तोमर ने संयुक्त रूप से प्रकट किए। मौजूद लोगों ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के छबिचित्र पर पुष्पअर्पित कर उन्हें याद किया। कार्रक्रम में निधि समर्पण अभियान के तहत बूथ नंबर 186 पार्टी फंड के लिए भी राशि भेंट की गई। जिसमें रवेन्द्र सिंह उर्फ ल्ललू, पिंटू तोमर, हैप्पी तोमर, वीरेन्द्र सिंह, सुरेश बाल्मीकी दुष्यंत तोमर, पंकज शर्मा, तेजपाल, पवन शर्मा, सचिन शर्मा, राकेश शर्मा, छोटू तोमर, दीपक कुमार, राजकुमार, ओमपाल सिंह, भोलानी, मनोज यादव, कैलाश चंद्र आदि ने योगदान दिया।
Author: Sunil Kumar
SASNI, HATHRAS