Dulari Devi: जिनके बरतन मांजे, उनसे दुलारी देवी ने सीखी मिथिला पेंटिंग; वित्त मंत्री की साड़ी इन्हीं की दी हुई

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Bihar News: पद्मश्री दुलारी देवी ने बताया कि मुझे बहुत खुशी हुई है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मिथिला पेंटिंग वाली साड़ी पहनी। वित्तमंत्री जब मिथिला चित्रकला संस्थान में आई तब उन्हें खुद की बनाई साड़ी भेंट की थी। इस साड़ी को बनाने में एक महीने का समय लग गया।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार के आम बजट में बिहार के लिए पिटारा खोल दिया। इस कारण बजट की तो खूब चर्चा हो ही रही है। लेकिन, एक और चीज की चर्चा पूरे देश में हो रही है। वह है वित्त मंत्री की साड़ी। उन्होंने इस बार मिथिला पेंटिंग वाली बैंगलोरी सिल्क साड़ी पहनकर बजट पेश किया। इसमें मछली और कमल फूल के चिह्न बने हुए हैं। खास बात यह है कि वित्त मंत्री को जिन्होंने यह साड़ी भेंट की, वह मिथिला की रहने वाली हैं। उनका नाम दुलारी देवी है। आज वह पूरे देश में सुर्खियों में हैं। यह वहीं दुलारी देवी हैं जो कभी पेट पालने के लिए दूसरों के बर्तन मांजा करती थीं। आज उनकी दी हुई साड़ी पहनकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करने के लिए पहुंची तो पूरा बिहार अपनी बेटी पर फिर से गर्व महसूस करने लगा। आइए जानते हैं उनके बारे में…

दुलारी देवी की कहानी एक सशक्त उदाहरण है
पद्मश्री पुरस्कार विजेता दुलारी देवी की कहानी न केवल कला के महत्व को दर्शाती है, बल्कि यह यह भी बताती है कि संघर्ष और मेहनत से किसी भी परिस्थिति को बदलने की क्षमता होती है। मधुबनी जिले के रांटी गांव की रहने वाली दुलारी देवी की कहानी एक सशक्त उदाहरण है संघर्ष और सफलता की। उनका जन्म एक मछुआरा परिवार में हुआ था, जहां न तो शिक्षा का कोई साधन था और न ही जीवन के बेहतर अवसर। कम उम्र में ही उनकी शादी हो गई और बच्चे भी हुए। लेकिन जब पति के तानों से तंग आकर उन्होंने घर छोड़ने का फैसला लिया, तो उनका जीवन पूरी तरह से बदल गया।

2021 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया
दुलारी देवी ने शुरुआत खेतों में मजदूरी और दूसरों के घरों में बर्तन मांजने और झाड़ू-पोछा लगाने से की। यह कठिन जीवन उन्हें मिथिला पेंटिंग से परिचित करवा गया, जो अब बिहार और भारत की सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने कर्पूरी देवी और महासुंदरी देवी से इस कला की शिक्षा ली और जल्द ही एक प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग कलाकार बन गईं। 2021 में उन्हें उनके योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। दुलारी देवी ने 16 साल की उम्र में अपने पति द्वारा त्याग दिए जाने से लेकर अपने बच्चे को खोने और घरेलू सहायिका के रूप में काम करने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने मिथिला कला संस्थान और सेवा मिथिला संस्थान जैसे संगठनों के माध्यम से एक हजार से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित किया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पारंपरिक कला भविष्य की पीढ़ियों में पनपे।

वित्त मंत्री से साड़ी पहनने का अनुरोध किया था
इधर, वित्त मंत्री के मिथिला पेंटिंग वाली साड़ी पहन बजट पेश करने बाद पद्मश्री दुलारी देवी ने बताया कि मुझे बहुत खुशी हुई है कि उन्होंने मेरी दी साड़ी पहनी। वित्तमंत्री जब मिथिला चित्रकला संस्थान में आई तब उन्हें खुद की बनाई साड़ी भेंट की थी। इसे बैंगलोरी सिल्क कहा जाता है। मैंने वित्त मंत्री से साड़ी पहनने का अनुरोध किया था। इस साड़ी को बनाने में एक महीने का समय लग गया। आज मुझे बहुत खुशी हो रही है कि उन्होंने मिथिला पेंटिंग वाली साड़ी पहनकर बजट पेश किया।

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Author: planetnewsindia

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