पुल, पुलिया, फ्लाईओवर और डिवाइडर पर महामृत्युंजय तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। गरुण मित्र तकनीक वाहन के आगे के बंपर पर लगाया जाता है। बंपर के आगे ग्रिल के साथ दो हैवी ड्यूटी शॉकर अंदर की ओर जुड़े होते हैं और उसे ब्रेक से जोड़ा दिया जाता है।

सड़क हादसों में कमी लाने के लिए अलीगढ़ शहर के भौतिक विज्ञानी मदन मोहन शर्मा ने महामृत्युंजय और गरुण मित्र तकनीकों की खोज की है। गरुण मित्र तकनीक में वाहनों के आगे खास किस्म के शॉक एब्जार्बर लगाए जाते हैं जिसमें दूसरे वाहन के साथ टकराने पर झटके की तीव्रता बहुत कम हो जाती है।

ऐसे काम करेगा महामृत्युंजय तकनीक
ऐसे काम करेगी गरुण मित्र तकनीक
मदन मोहन ने बताया कि गरुण मित्र तकनीक वाहन के आगे के बंपर पर लगाया जाता है। बंपर के आगे ग्रिल के साथ दो हैवी ड्यूटी शॉकर अंदर की ओर जुड़े होते हैं और उसे ब्रेक से जोड़ा दिया जाता है। किसी भी चीज या वाहन से टकराते ही सिस्टम नैनो सेकंड से भी कम समय में काम करता है। टक्कर के लगते ही ग्रिल से जुड़े शॉकर उसकी टक्कर की ऊर्जा को अपने अंदर समाहित कर कम कर देते हैं। साथ ही सेल्फ ब्रेक लग जाता है। कार में लगवाने में इसका खर्च 30 हजार रुपये आएगा। बड़े वाहन पर इससे ज्यादा खर्च आएगा।
ऐसे आया तकनीक ईजाद का ख्याल
मदन मोहन शर्मा ने बताया कि सगे चाचा रामनिवास शर्मा और चाची रामकली की वर्ष 2008 में नरौरा के पास सड़क हादसे में मौके पर ही मौत हो गई थी। कार में सवार चार अन्य परिजन भी घायल हो गए थे। इससे उन्हें भी धक्का लगा था। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2009 से ऐसी तकनीक पर काम करना शुरू किया, जो हादसों में होने वाले नुकसान को कम कर सके। उन्होंने वाहनों में लगाकर इसका प्रयोग शुरू कर दिया। ट्रक, बस और कार में ये सिस्टम लगा चुके हैं।
