
लखीमपुर खीरी : उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान दुधवा टाइगर रिजर्व हर साल की तरह इस साल भी प्रवासी परिंदों से गुलजार हो रहा है. दुधवा में प्रवासी पक्षियों की कलरव की आवाज गूंज रही है . देसी-विदेशी सैलानी प्रवासी परिंदों के दीदार करने और उनकी मनमोहक कलरव सुनने के लिए दुधवा पहुंचने लगे हैं. गौरतलब है कि प्रवासी पक्षी सर्दियों में मौसम में ही दुधवा में आते हैं, क्योंकि जब साइबेरिया के ठंडे जलाशयों में बर्फ जम जाती है तो इन परिंदों के भोजन और आवास की समस्या पैदा हो जाती है. तब यह पक्षी लगभग 15 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर भारत समेत अन्य गर्म देशों की ओर रुख करते हैं. बता दें कि प्रवासी पक्षी नवंबर से फरवरी तक 4 माह प्रवास कर प्रजनन करते हैं, जिसके कारण इन दिनों तराई के जलाशय प्रवासी पक्षियों से गुलजार हो जाते हैं.
दुधवा टाइगर रिजर्व में रंग बिरंगी प्रवासी परिंदों का कलरव प्रकृति और पक्षी प्रेमियों को अपनी और आकर्षित करता है. ये पक्षी मध्य एशिया, चीन, तिब्बत, साइबेरिया, लद्दाख आदि स्थानों से बड़ी संख्या में जलीय पक्षियों के झुंड में तराई के जलाशयों में आते हैं. परिदों में साइबेरियन, अबलक, गुर्चिया बत्तख, जसपुन बिल, ब्राहमानी डक, कूट, मून हेन, ग्रे लेग गूस, टस्टेड डक, रेड क्रेस्ट्रड बोचार्ड आदि शामिल हैं.
इन जलाशयों पर दिखते हैं प्रवासी पक्षी
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ रंगाराजू टी ने बताया कि आने वाले मेहमान परिदों की सुरक्षा और उनके भोजन का पार्क प्रशासन पूरी तैयार से ख्याल रखता है. क्योंकि ये प्रवासी परिंदे हजारों किलोमीटर की दूरी तय करते हैं. पक्षियों की गतिविधियों का अध्ययन करने वाले लोग भी इन दिनों जलाशयों के इर्द-गिर्द अपना डेरा डाल देते हैं. जिसमें लखीमपुर खीरी की सेमरई झील, नगरिया झील, मैनहेन झील, रमियाबेहड़ झील, अहमदाबाद, शारदा नहर का का क्षेत्र शामिल है.
Author: planetnewsindia
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