

एएनआई से बात करते हुए अभिनेता ने कहा, ‘मुझे सबसे ज्यादा हैरानी इस बात से होती है कि कुछ युवा कलाकारों ने पूरा इंटरव्यू देखे बिना, सिर्फ क्लिकबेट हेडलाइन देखकर मेरे खिलाफ प्रतिक्रिया दी और मुझ पर पर्सनल हमले किए। जब मैं ‘डस्टबिन मीडियम’ कहता हूं, तो मेरा मतलब यह है कि हम कुछ भी बनाते हैं और टीवी पर दिखा देते हैं और सोचते हैं कि लोग इसे देखेंगे।’
एक्टर ने आगे कहा, ‘जो भी क्रिएटिव है और टेलीविजन को बेहतर बनाना चाहता है, उससे मैं यही कह रहा हूं कि आज हम जिस तरह का कंटेंट बना रहे हैं, वह उस स्तर का नहीं है। मैं आज ओटीटी क्यों देख रहा हूं? क्योंकि वहां मुझे कुछ बेहतरीन चीजें देखने को मिल रही हैं।’
रोहित ने कहा कि लोकतंत्र में लोग उनसे असहमत हो सकते हैं, लेकिन उन्हें पहले उनके बयान का संदर्भ समझना चाहिए। अभिनेता ने उन कलाकारों पर भी नाराजगी जताई, जिन्होंने उनके खिलाफ बयान दिए।
एक्टर ने कहा, ‘मैंने किसी एक्टर, डायरेक्टर या प्रोड्यूसर के बारे में बात नहीं की थी। तो उन 3-4 लोगों के बारे में सोचिए, जिन्होंने टीवी पर कमेंट किया। उन्होंने टीवी पर उतनी मेहनत नहीं की है, जितनी मैंने की है। लेकिन इस विवाद को खत्म करने के लिए मैं इतना कहना चाहता हूं कि मैंने हमेशा टेलीविजन के हित के बारे में सोचा है। पिछले 30 वर्षों से मैं टेलीविजन के लिए आवाज उठाता रहा हूं।’

पिछले महीने किंडल कास्ट के यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए रोहित से पूछा गया था कि क्या टीवी इंडस्ट्री पहले से ज्यादा प्रोफेशनल हो गई है, लेकिन अब इसमें क्राफ्ट के लिए पहले जैसी लगन नहीं रही। इस पर रोहित ने कहा था, ‘मुझसे यह सवाल कई बार पूछा गया है और कभी-कभी मुझे लगता है कि ऐसा बोलकर मैं एहसान फरामोश न लगूं। लेकिन टेलीविजन एक डस्टबिन मीडियम है।’
रोहित ने आगे कहा था, ‘अगर आप इसे आज देखते हैं, तो यह कल के अखबार जैसा है। कल आप इसे भूल जाते हैं। भारत में दुर्भाग्य से जितना कंटेंट बनाया जा रहा है और एक जैसा कंटेंट बार-बार बनाया जा रहा है, उसमें क्रिएटिविटी बहुत कम है।’

