रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर का एलान किया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने इस पहल का समर्थन किया है। हालांकि, रूस ने अब तक इस समझौते पर सहमति की पुष्टि नहीं की है। इसी बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस ने रविवार को कई बिजली संयंत्रों पर हमले किए। ऐसे में सवाल है कि क्या पश्चिमी देशों के समर्थन के बावजूद रूस ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए तैयार होगा?

ट्रंप ने रविवार को सोशल मीडिया पर घोषणा की कि रूस और यूक्रेन के बीच तत्काल प्रभाव से ऊर्जा सीजफायर लागू हो गया है। उन्होंने दावा किया कि दोनों पक्ष इस पर सहमत हैं। हालांकि, यूक्रेन को भी इस घोषणा की जानकारी अचानक मिली। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन सीजफायर का समर्थन करता है, लेकिन रूस को भी इसे स्वीकार करना होगा। रूस की ओर से सहमति की पुष्टि नहीं होने के कारण इस पहल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप से बातचीत के दौरान ऊर्जा सीजफायर का समर्थन किया। उन्होंने रूस से समझौते का पालन करने और ऊर्जा ढांचे तथा आम नागरिकों पर हमले तुरंत रोकने की अपील की। कार्नी ने यह भी कहा कि कनाडा अमेरिका को तेल और डीजल का निर्यात जारी रखेगा। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने कहा कि रूस ने सप्ताहांत में यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर हमले तेज किए हैं। उनके मुताबिक, इन हमलों से आम नागरिक ठंड और अंधेरे में रहने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि रूस हमले रोकता है तो यूक्रेन सीजफायर के लिए तैयार है।
जेलेंस्की ने रविवार को आरोप लगाया कि रूस ने यूक्रेन के कई बिजली संयंत्रों को निशाना बनाया। इनमें राजधानी कीव और खारकीव का एक-एक ऊर्जा संयंत्र शामिल है। इन हमलों से बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन के आसमान में पूरे दिन रूसी शाहेद ड्रोन उड़ते रहे। रूस ने 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण स्तर पर हमला शुरू करने के बाद से ऊर्जा ढांचे को लगातार निशाना बनाया है। इससे बिजली और हीटिंग की आपूर्ति में कमी आई है। यूक्रेन भी जवाबी कार्रवाई में रूस की तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाता रहा है। उसका कहना है कि इनसे रूस को युद्ध के लिए धन मिलता है।
ऊर्जा सीजफायर के समर्थन के बीच रूस से डीजल खरीदने के अमेरिकी फैसले पर विवाद भी जारी है। ट्रंप ने सीजफायर की घोषणा से दो दिन पहले रूसी डीजल पर अमेरिकी प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देने वाले सौदे का एलान किया था। यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने इसका विरोध किया। जेलेंस्की ने इसे कमजोर फैसला बताया। कार्नी ने भी कहा कि यह सौदा यूरोप में शांति और स्थिरता स्थापित करने के प्रयासों के विपरीत है। सात अमेरिकी सीनेटरों, जिनमें चार रिपब्लिकन हैं, ने रविवार को इस सौदे को अवैध बताया। पश्चिम एशिया में युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने से तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
ट्रंप ने जेलेंस्की के नेतृत्व पर क्या कहा और यूरोप ने कैसे दिया जवाब?
ट्रंप ने शनिवार को कहा था कि यूक्रेन को नया राष्ट्रपति मिलना चाहिए, जो युद्ध खत्म कर सके। इसके जवाब में जेलेंस्की ने कहा कि देश का नेता कौन होगा, इसका फैसला यूक्रेन के लोग करेंगे। जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने जेलेंस्की और यूक्रेन सरकार को समर्थन जारी रखने की बात कही। यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी यूक्रेन की स्वतंत्रता की लड़ाई में जेलेंस्की का समर्थन किया। कीव के कुछ नागरिकों ने भी ट्रंप की टिप्पणी पर चिंता जताई। उनका कहना था कि यूक्रेन के भविष्य का फैसला यूक्रेन के लोगों को ही करना चाहिए।
ऊर्जा सीजफायर की घोषणा ऐसे समय हुई है, जब रूस और यूक्रेन के बीच हमले जारी रहने के आरोप लग रहे हैं। अमेरिका में अगले महीने होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतें भी ट्रंप प्रशासन के लिए चिंता का विषय हैं। रूस से डीजल खरीदने के फैसले और ऊर्जा सीजफायर के समर्थन के बीच अमेरिकी नीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रूस ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए सहमत होगा। जब तक मॉस्को की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक इस घोषणा के जमीन पर लागू होने को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी।


