लखनऊ- उत्तर प्रदेश प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना से संबंधित जानकारी

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यह वृद्धावस्था पेंशन योजना स्वैच्छिक और अंशदायी पेंशन योजना है। इस पहल के तहत, पात्र छोटे और सीमांत किसानों को साठ वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद 3,000 रुपये की निश्चित मासिक पेंशन दी जाती है। अर्हता प्राप्त करने के लिए, किसान अपने कामकाजी वर्षों के दौरान पेंशन फंड में मासिक योगदान करते हैं, जिसमें केंद्र सरकार का भी उतना ही योगदान होता है। किसानों को बुढ़ापे में सुरक्षा कवच प्रदान करने वाली इस ऐतिहासिक योजना ने अपने कार्यान्वयन के पांच साल पूरे कर लिए हैं। पीएम-केएमवाई का सफल कार्यान्‍वयन प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (पीएम-केएमवाई) के तहत, छोटे और सीमांत किसान पेंशन फंड में मासिक सदस्यता का भुगतान करके नामांकन कर सकते हैं। 18 से 40 वर्ष की आयु के किसानों को जब तक वे 60 वर्ष के नहीं हो जाते तब तक 55 से 200 रु. प्रति माह के बीच योगदान करना होगा। एक बार जब वे 60 वर्ष की आयु तक पहुँच जाते हैं, तो नामांकित किसानों को 3,000 रुपये की मासिक पेंशन मिलती है, बशर्ते वे योजना के बहिष्करण मानदंडों को पूरा करते हों। जीवन बीमा निगम (एलआईसी) पेंशन फंड का प्रबंधन करता है, और लाभार्थी पंजीकरण की सुविधा सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) और राज्य सरकारों के माध्यम से की जाती है। 1 अगस्त 2019 तक 2 हेक्टेयर तक की खेती योग्य भूमि वाले और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के भूमि रिकॉर्ड में सूचीबद्ध सभी किसान इस योजना के तहत लाभ के लिए पात्र हैं। 6 अगस्त 2024 तक कुल 23.38 लाख किसान इस योजना से जुड़ चुके हैं। इस योजना के तहत, बिहार 3.4 लाख से अधिक पंजीकरणों के साथ अग्रणी है जबकि झारखंड 2.5 लाख से अधिक पंजीकरणों के साथ दूसरे स्थान पर है।

मीडिया रिपोर्टर पंकज कुमार गुप्ता जालौन उत्तर प्रदेश प्लानेट न्यूज

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संजय भाटिया ने लोकसभा चुनाव में रचा था इतिहास संजय भाटिया कुरुक्षेत्र विश्वविद्याल ग्रेजुएट हैं। इनका जन्म हरियाणा के पानीपत जिले में हुआ है। वह भाजपा के महामंत्री भी रह चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी संजय भाटिया ने अपने पहले ही लोकसभा चुनाव में इतिहास रच दिया था। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 6.54 लाख मतों के अंतर से मात दी थी। संजय भाटिया ने प्रदेश के 53 साल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 909432 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप शर्मा को 654269 वोटों के अंतर से हराया था। राहुल गांधी ने दिया था कर्मवीर के नाम का सुझाव वहीं कर्मवीर सिंह बौद्ध किसी भी गुट या खेमे से जुड़े हुए नेता नहीं माने जाते। यही कारण है कि उन्हें संगठन के भीतर एक संतुलित और सर्व स्वीकार्य चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। वे ‘संविधान बचाओ अभियान’ में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते रहे हैं। एससी समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध सामाजिक संतुलन के नजरिये से भी एक अहम दावेदार है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्वयं उनके नाम का सुझाव दिया है। अंबाला के मुलाना विधानसभा में रहने वाले कर्मवीर सिंह प्रशासकीय अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़कर कार्य कर रहे थे। कांग्रेस ने उन्हें हिमाचल प्रदेश में एससी सेल का प्रभारी भी बनाया था। राष्ट्रीय स्तर पर वह कन्वीनर भी हैं।