कहीं ट्रैक पर मिला लकड़ी का बोटा तो कहीं पटरियों से छेड़छाड़… एक जगह गमछा बिछाकर ट्रेन के सामने सोता मिला शख्स,

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वायरल वीडियो में एक अधेड़ उम्र का शख्स छाता लगाकर रेल की पटरी पर लेटा है. उसने तकिये के तौर पर गमछे को ट्रैक पर रखा हुआ है. इस दौरान ट्रेन उसके सामने आकर खड़ी हो जाती है. तब भी शख्स नींद में रहता है.

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है कि जिसमें एक अधेड़ उम्र का शख्स छाता लगाकर रेल की पटरी पर लेटा है. इस दौरान ट्रेन उसके सामने आकर खड़ी हो जाती है. जिससे लोको पायलट नीचे उतरता है और शख्स को नींद से जगाकर ट्रैक से हटाता है. जिसके बाद ट्रेन आगे बढ़ती है. ये घटना उत्तर प्रदेश की बताई जा रही है. हालांकि, रेलवे ने इसको लेकर कोई बयान नहीं जारी किया है.

इस बीच यूपी के फर्रुखाबाद में पैसेंजर ट्रेन को लकड़ी का बोटा से बेपटरी करने की साजिश ड्राइवर की सूझबूझ से टल गई. वहीं, दूसरा हादसा शामली जिले में टल गया जहां तकरीबन 25 से 30 पेंड्रोल क्लिप (रेल पटरी पर लगे हुक) निकले पड़े थे. इसकी सूचना जब रेलवे को मिली तो विभाग अलर्ट हो गया. फौरन मामले का संज्ञान लेते हुए पेंड्रोल क्लिप लगाकर ट्रैक को ठीक किया गया.

पटरी पर रखा लकड़ी का बड़ा टुकड़ा

बीते शनिवार को फर्रुखाबाद के कासगंज-फर्रुखाबाद पैसेंजर ट्रेन के सामने लकड़ी का बोटा डालकर ट्रेन को दुर्घटनाग्रस्त करने का असमाजिक तत्वों ने प्रयास किया. गनीमत रही कि समय रहते ड्राइवर की नजर उसपर पड़ गई. फिलहाल,आरपीएफ मामले की जांच पड़ताल में जुट गई है.

बताया जा रहा है कि भटासा स्टेशन के पास लगभग 300 मीटर की दूरी पर एक लकड़ी का बोटा रात में अराजकिया. मगर जब तक ट्रेन रुक पाती लकड़ी का बोटा इंजन के अगले हिस्से में फंस गया.काफी कोशिशों के बाद इंजन में फंसा हुआ लकड़ी का बोटा बाहर निकाला जा सका. जिसके बाद ट्रेन आगे के लिए रवाना हुई.

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सबसे ज्यादा पड़ गई

संजय भाटिया ने लोकसभा चुनाव में रचा था इतिहास संजय भाटिया कुरुक्षेत्र विश्वविद्याल ग्रेजुएट हैं। इनका जन्म हरियाणा के पानीपत जिले में हुआ है। वह भाजपा के महामंत्री भी रह चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी संजय भाटिया ने अपने पहले ही लोकसभा चुनाव में इतिहास रच दिया था। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 6.54 लाख मतों के अंतर से मात दी थी। संजय भाटिया ने प्रदेश के 53 साल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 909432 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप शर्मा को 654269 वोटों के अंतर से हराया था। राहुल गांधी ने दिया था कर्मवीर के नाम का सुझाव वहीं कर्मवीर सिंह बौद्ध किसी भी गुट या खेमे से जुड़े हुए नेता नहीं माने जाते। यही कारण है कि उन्हें संगठन के भीतर एक संतुलित और सर्व स्वीकार्य चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। वे ‘संविधान बचाओ अभियान’ में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते रहे हैं। एससी समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध सामाजिक संतुलन के नजरिये से भी एक अहम दावेदार है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्वयं उनके नाम का सुझाव दिया है। अंबाला के मुलाना विधानसभा में रहने वाले कर्मवीर सिंह प्रशासकीय अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़कर कार्य कर रहे थे। कांग्रेस ने उन्हें हिमाचल प्रदेश में एससी सेल का प्रभारी भी बनाया था। राष्ट्रीय स्तर पर वह कन्वीनर भी हैं।