

भारत ने गुवाहाटी में वेस्टइंडीज के खिलाफ 406 रन का रिकॉर्ड लक्ष्य हासिल किया, लेकिन इस मुकाबले के बाद मुख्य कोच गौतम गंभीर ने पिच और परिस्थितियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बल्लेबाज और गेंद के बीच बेहतर मुकाबला होना चाहिए और गेंदबाजों के लिए भी कुछ मदद होनी जरूरी है।
गुवाहाटी में भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे में 406 रन के लक्ष्य का सफल पीछा कर इतिहास रच दिया। बल्लेबाजों के लिए यह मुकाबला यादगार रहा, लेकिन भारतीय मुख्य कोच गौतम गंभीर ने मैच के बाद पिच और परिस्थितियों को लेकर चिंता जताई। उनका मानना है कि क्रिकेट में बल्लेबाज और गेंद के बीच बराबरी का मुकाबला होना जरूरी है।
गंभीर ने साफ कहा कि ऐसी परिस्थितियों में गेंदबाजों के लिए बहुत कम मदद होने से उनके प्रदर्शन का सही आकलन करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि पिच में गेंदबाजों के लिए भी कुछ ऐसा होना चाहिए, जिससे वे मुकाबले में अपनी भूमिका निभा सकें। उन्होंने कहा, ‘जब आप इस तरह की पिच पर गेंदबाजी करते हैं तो यह गेंदबाजों के साथ न्याय नहीं है। हमें गेंदबाजों को भी कुछ देना होगा, ताकि कम से कम उनके पास काम करने के लिए कुछ हो।’ गेंदबाजों के आंकड़ों को लेकर भी गंभीर ने अहम बात कही। उनका मानना है कि केवल गेंदबाजी के आंकड़े देखकर किसी गेंदबाज को कठघरे में खड़ा नहीं करना चाहिए, बल्कि यह देखना चाहिए कि उसने अपनी योजना को कितनी अच्छी तरह लागू किया।
गंभीर ने कहा, ‘सबसे पहली चीज यह है कि आपको गेंदबाजों के प्रति थोड़ी सहानुभूति और उन्हें कुछ अतिरिक्त गुंजाइश देनी चाहिए। अक्सर आप गेंदबाजों पर सख्त नहीं हो सकते, क्योंकि कई बार उनके गेंदबाजी आंकड़े ऐसे होते हैं, जिनसे लगता है कि उन्होंने खराब गेंदबाजी की है, जबकि उन्होंने उतनी खराब गेंदबाजी नहीं की होती। क्योंकि अंतर बहुत कम होता है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘इसके अलावा, मुझे लगता है कि आप सिर्फ अच्छी जगह पर गेंदबाजी कर सकते हैं, क्योंकि पांच फील्डर अंदर हैं, दो नई गेंदें हैं और इस समय जिस तरह की पावर हिटिंग हो रही है, उसमें गेंदबाजों के पास बहुत ज्यादा विकल्प नहीं होते।’ गंभीर ने कहा कि कोचिंग स्टाफ को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि गेंदबाज ने अपनी योजना को सही तरीके से लागू किया या नहीं।
उन्होंने कहा, ‘इसीलिए एक कोच और सपोर्ट स्टाफ के तौर पर सबसे पहले हम यह देखते हैं कि क्या वे अपनी गेंदबाजी या अपनी योजना को सही तरीके से लागू कर पाए। अगर वे ऐसा करने में सफल रहे तो आपको उनके खिलाफ सख्त नहीं होना चाहिए। अगर आप सिर्फ उनके आंकड़ों को देखकर बहुत सख्त हो जाएंगे तो हम कभी गेंदबाज विकसित नहीं कर पाएंगे। कल्पना कीजिए कि आकीब नबी अपना पहला मैच खेल रहा है। कहीं न कहीं आपको उसे थोड़ा समर्थन देना होगा और उसके लिए थोड़ा अतिरिक्त सहारा या अतिरिक्त विकल्प रखना होगा। लेकिन दुर्भाग्य से आज किसी भी गेंदबाज के लिए ज्यादा कुछ नहीं था।’
2027 वनडे विश्व कप में लगभग एक साल का समय बचा है, लेकिन गंभीर के मुताबिक भारत के पास प्रयोग करने के लिए उतना समय नहीं है जितना दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि आईपीएल और भारत-ऑस्ट्रेलिया सीरीज के कारण उपलब्ध समय काफी कम हो जाएगा। गंभीर ने कहा, ‘आपने कहा कि एक साल है, लेकिन उस एक साल में तीन महीने आईपीएल में चले जाएंगे और तीन महीने भारत-ऑस्ट्रेलिया सीरीज में चले जाएंगे। इसलिए इस सीरीज के बाद हमारे पास मुश्किल से 20 वनडे होंगे और 20 वनडे वास्तव में बहुत ज्यादा नहीं हैं। इसमें श्रीलंका के खिलाफ तीन और जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैच भी शामिल हैं। मेरा मानना है कि ज्यादा समय नहीं है। इसलिए हम जो भी योजना बनाएंगे, जो भी विकल्प तैयार करेंगे, हमें उसे जल्द से जल्द करना होगा।’
उन्होंने कहा, ‘इसलिए आईपीएल के बाद हमारे पास जो भी विकल्प होंगे और हमारी व्यापक तस्वीर में जो भी टीम तैयार होगी, हम उसे आईपीएल के बाद ही आजमा पाएंगे। अभी अलग-अलग विकल्पों को आजमाने का समय है। जिस तरह आज आकीब को मौका मिला, उसी तरह जिम्बाब्वे सीरीज तक हम दूसरे खिलाड़ियों को भी मौका देंगे और देखेंगे कि वे इस प्रारूप में क्या कर सकते हैं।’
आकीब नबी को सीरीज में 1-0 की बढ़त के बीच भारत के लिए डेब्यू का मौका मिला। गंभीर ने बताया कि ऐसे मुकाबलों में युवा खिलाड़ियों को उतारना क्यों जरूरी है। उनके मुताबिक विश्व कप में दबाव अलग स्तर का होता है और खिलाड़ियों को उसी तरह की परिस्थितियों में तैयार करना जरूरी है। गंभीर ने कहा, ‘हम आकीब को अगले मैच में भी मौका दे सकते थे, जब मुकाबला डेड रबर होता। लेकिन डेड रबर में वह दबाव नहीं होता जो सीरीज जीतने के दबाव के साथ आता है। और हम सभी जानते हैं कि विश्व कप दबाव के बारे में है। क्रिकेट इस तरह नहीं बदलेगा, सिर्फ दबाव अलग होगा क्योंकि विश्व कप चार साल में एक बार आता है। इसलिए हम गेंदबाजों को दबाव में रखना चाहते हैं।’
उन्होंने गुनूर बरार का उदाहरण देते हुए कहा, ‘उदाहरण के लिए गुनूर। पहले 10 ओवर में गुनूर से गेंदबाजी करवाना, डेथ में गेंदबाजी करवाना। मुझे पता है कि लोग उसके आंकड़ों की बात करेंगे, लेकिन जितना ज्यादा वह कठिन परिस्थितियों और कठिन मौकों पर गेंदबाजी करेगा, भारतीय क्रिकेट के लिए उतना ही बेहतर होगा। आप उससे बीच के ओवरों में गेंदबाजी करवा सकते हैं और उसके अच्छे आंकड़े हासिल कर सकते हैं, उससे रक्षात्मक गेंदबाजी करवा सकते हैं, लेकिन हम उन्हें ऐसे मौकों पर जितना ज्यादा सामने लाएंगे, भारतीय क्रिकेट के लिए उतना ही बेहतर होगा।’