एबम देवी को किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में गिरफ्तार किया गया था। वह कई साल तक जेल में रही। पिछले साल जमानत मिलने के बाद उसे अदालत की प्रत्येक सुनवाई में उपस्थित होना था, लेकिन वह लगातार पेशी से बचती रही। पिछले सप्ताह हुई सुनवाई में भी उसके गैरहाजिर रहने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया।

चंडीगढ़ पीजीआई में वर्ष 2019 में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट गिरोह मामले की मुख्य आरोपियों में शामिल एबम देवी अब फरार है। लंबे समय तक बुड़ैल जेल में बंद रही एबम को पिछले साल अदालत से जमानत मिली थी।
पुलिस के अनुसार, एबम देवी को किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में गिरफ्तार किया गया था। वह कई साल तक जेल में रही। पिछले साल जमानत मिलने के बाद उसे अदालत की प्रत्येक सुनवाई में उपस्थित होना था, लेकिन वह लगातार पेशी से बचती रही। पिछले सप्ताह हुई सुनवाई में भी उसके गैरहाजिर रहने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया। इसके बाद जमानत रद्द करते हुए गैर-जमानती वारंट जारी किए गए। पुलिस अब उसके पुराने और संभावित ठिकानों पर तलाश कर रही है।
जांच में सामने आया था कि एबम देवी ने खुद करीब ढाई लाख रुपये लेकर अपनी किडनी डोनेट की थी। इसके बाद वह किडनी ट्रांसप्लांट गिरोह के संपर्क में आई और कथित तौर पर उसके लिए काम करने लगी। आरोप है कि उसने मणिपुर की एक महिला को चंडीगढ़ में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बुलाया था। पुलिस के मुताबिक, यहां महिला को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डोनर के तौर पर इस्तेमाल करने की साजिश रची गई।
फर्जी दस्तावेज तैयार कर ट्रांसप्लांट की तैयारी
जांच में आरोप सामने आया कि गिरोह के सदस्यों ने महिला की किडनी किसी अन्य व्यक्ति को ट्रांसप्लांट कराने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे। मणिपुर निवासी बिमल से ट्रांसप्लांट के लिए दो लाख रुपये एडवांस और ऑपरेशन के बाद ढाई लाख रुपये लेने की बात सामने आई थी।
गरीब लोगों को पैसों का लालच देकर बनाते थे डोनर
पुलिस जांच के अनुसार, गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाता था। उन्हें नौकरी या पैसों का लालच देकर चंडीगढ़ लाया जाता था। इसके बाद फर्जी दस्तावेजों के सहारे किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कोशिश की जाती थी। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने गिरोह से जुड़े कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी। अब एबम देवी के फरार होने के बाद पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

