पीयू छात्रसंघ चुनाव जीतकर अध्यक्ष बने एबीवीपी के अंकित बिढान अमर उजाला कार्यालय पहुंचे। इस दाैरान उन्होंने कई मुद्दों पर खास बातचीत की। अंकित ने कहा कि पीयू में जीत पंजाब विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए लहर बनाएगी।

पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र परिषद चुनाव में अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज करने वाले अंकित बिढान ने दावा किया है कि पीयू में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की जीत का असर पंजाब विधानसभा चुनाव पर भी पड़ेगा।
अंकित : एसओआई ने हमारे घोषणापत्र पर सहमति जताई थी। गठबंधन ने हिंदू-सिख भाईचारे की मिसाल पेश की है। हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों के विद्यार्थियों ने हमारा समर्थन किया। यह विद्यार्थी इकाइयों का गठबंधन था। राजनीतिक दलों के संदर्भ में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
सवाल : चुनाव में राजनीतिक हस्तक्षेप पर क्या कहेंगे?
अंकित : आम आदमी पार्टी ने चुनाव में पूरी ताकत लगाई लेकिन परिसर में बाहुबल, धनबल और राजनीतिक ताकत नहीं चली। छात्र संघ चुनाव में केवल विद्यार्थियों की भागीदारी होनी चाहिए। इस चुनाव में आप का हस्तक्षेप अपेक्षा से अधिक रहा।
सवाल : जीत के बाद तीन प्रमुख प्राथमिकताएं क्या रहेंगी?
अंकित : छात्राओं से रक्षाबंधन पर किए वादे के अनुसार ई-रिक्शा सेवा शुरू कराना पहली प्राथमिकता है। इसके बाद पीवीसी एप शुरू कराने और शोधार्थियों के फेलोशिप संबंधी मुद्दे उठाने पर काम होगा। घोषणापत्र में गैर-जेआरएफ शोधार्थियों के लिए कम से कम 20 हजार रुपये मासिक छात्रवृत्ति की मांग है। पीएचडी शोधार्थियों के छात्रावास समेत अन्य समस्याएं भी उठाई जाएंगी।
सवाल : परिसर की सुरक्षा के लिए क्या योजना है?
अंकित : परिसर में स्मार्ट पीवीसी पहचान पत्र लागू करने की योजना है। इसे स्कैन करने पर विद्यार्थी की पूरी जानकारी सामने आएगी। इससे दूसरे विद्यार्थी का पहचान पत्र दिखाकर प्रवेश करने जैसी समस्याओं पर रोक लगेगी। अंधेरे वाले स्थानों और सीसीटीवी की पहुंच से बाहर क्षेत्रों की पहचान की जा चुकी है। वहां रोशनी की व्यवस्था की जाएगी। दो महीने में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने पर भी काम होगा।
सवाल : एबीवीपी से जुड़ने की शुरुआत कैसे हुई?
अंकित : मेरा कोई राजनीतिक पारिवारिक पृष्ठभूमि नहीं है। पिता व्यवसायी और मां गृहिणी हैं। पीयू में पढ़ाई के दौरान कुछ समस्याएं आईं तो एबीवीपी ने मदद की। इसके बाद छात्र राजनीति में रुचि बढ़ी। राष्ट्रीय नेतृत्व से मार्गदर्शन मिलता है और दिल्ली एबीवीपी से भी सहयोग लिया जाता है।
सवाल : मीत हेयर की छात्र राजनीति में सक्रियता पर क्या कहेंगे?
अंकित : किसी बाहरी राजनीतिक व्यक्ति का छात्र राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहना उचित नहीं है। छात्र राजनीति में विद्यार्थियों की भागीदारी ही होनी चाहिए।
