संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने पानी और किसानों के कर्जा माफी जैसे मुद्दों को लेकर चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर पक्का मोर्चा लगा दिया है। यह मोर्चा 7 सितंबर तक जारी रहेगा।

अपनी मांगों को लेकर चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों का संघर्ष जारी है। मंगलवार को किसानों ने खुले आसमान के नीचे जमीन पर सोकर रात गुजारी। रातभर धरना स्थल पर किसानों की मौजूदगी बनी रही।
सुविधाओं के अभाव और मौसम की चुनौती के बावजूद किसानों के हौसले में कोई कमी नहीं आई। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं सुना जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
बिजली कटने पर फेज-11 में लगाया जाम, एक घंटे वाहन फंसे
वहीं मंगलवार रात प्रशासन द्वारा धरना स्थल की बिजली आपूर्ति बंद किए जाने के विरोध में किसानों ने फेज-11 में सड़क जाम कर दिया। इस जाम के कारण करीब एक घंटे तक यातायात प्रभावित रहा, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बिजली बंद होने से किसान नाराज हो गए। उन्होंने इसके विरोध में फेज-11 में सड़क पर जाम लगा दिया। अचानक जाम लगने से आसपास के मार्गों पर भी दबाव बढ़ा। कई वाहन बीच रास्ते में फंस गए। मोगा के किसानों समिंदर सिंह, त्रिलोचन सिंह और इंदरजीत सिंह ने इसे अनुचित बताया। करीब एक घंटे बाद प्रशासन ने बिजली आपूर्ति बहाल कर दी। बिजली दोबारा शुरू होने के दस मिनट बाद किसानों ने जाम खोल दिया, जिसके बाद यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो सका।
धरना स्थल पर आए किसानों गुरतेज सिंह, जसविंदर सिंह ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से सरकार और प्रशासन के समक्ष आवाज उठा रहे हैं। इसके बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं निकल पाया है। ऐसे में उन्होंने आंदोलन को और मजबूती देने का फैसला किया है। किसानों ने कहा कि संघर्ष के दौरान उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन अपनी मांगें मनवाने का जज्बा बरकरार है।
रात के समय कई किसान जमीन पर बिस्तर लगाकर सोते नजर आए। किसानों का कहना है कि उन्हें घर-परिवार से दूर रहकर संघर्ष करना पड़ रहा है, लेकिन यह लड़ाई उनके अधिकारों और मांगों से जुड़ी है। इसलिए वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
किसानों ने कहा कि प्रशासन को धरना स्थल पर आवश्यक सुविधाओं का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि बातचीत के माध्यम से समस्या का समाधान निकाला जाए। किसानों के मुताबिक, मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने तक उनका धरना और संघर्ष जारी रहेगा। वह 7 सितम्बर तक धरना जारी रखेंगे।
