अलीगढ़ के थाना मडराक क्षेत्र में आगरा रोड पर सोमवार दोपहर एक बेकाबू ट्रक सड़क से करीब 20 फीट दूर स्थित सब्जी की दुकान में घुस गया। हादसे में सब्जी विक्रेता वीरपाल (53), उनकी पत्नी रामकली देवी (52) और दरोगा श्रवण कुमार तोमर (54) की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि एक सरकारी स्कूल का शिक्षक गंभीर रूप से घायल हो गया।

हादसे के वक्त दरोगा का सब्जी खरीदने का कोई इरादा नहीं था, बल्कि किस्मत उन्हें खींचकर उस मौत के मुहाने तक ले आई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जब दरोगा श्रवण कुमार मडराक थाने से अलीगढ़ की तरफ रवाना हुए थे, तब उन्होंने अपने साथियों से कहा था कि वे रास्ते में किसी होटल पर खाना खा लेंगे।
अलीगढ़। सब इंस्पेक्टर श्रवण कुमार तोमर 1992 बैच के पुलिसकर्मी थे। सोमवार की रात पोस्टमार्टम के बाद उनका पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया, जिसे देखते ही उनके बेटे का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और वह पोस्टमार्टम हाउस पर फूट-फूटकर रोने लगा। पुलिस लाइन में दिवंगत दरोगा को विभागीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। एसएसपी नीरज कुमार जादौन समेत तमाम पुलिस अधिकारियों ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर सलामी दी। इस दौरान मानवीय संवेदनाओं की मिसाल पेश करते हुए एसएसपी नीरज कुमार जादौन ने खुद दरोगा की अर्थी को कंधा दिया। इसके बाद परिजन पार्थिव शरीर लेकर उनके पैतृक जिले बागपत के लिए रवाना हो गए।
मृतकों की हड्डियां पूरी तरह चकनाचूर
अलीगढ़। जान गंवाने वाले दरोगा श्रवण कुमार तोमर, सब्जी विक्रेता वीरपाल और उनकी पत्नी रामकली के शवों की हालत देखकर पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर भी हैरान रह गए। ट्रक की टक्कर से तीनों के शरीर का कोई भी अंग सुरक्षित नहीं बचा था। पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि मृतकों की हड्डियां पूरी तरह चकनाचूर हो चुकी थीं, लीवर और फेफड़े फट चुके थे। आंतरिक अंग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। शवों की इस क्षत-विक्षत हालत को देखकर चिकित्सक भी असमंजस में पड़ गए कि ऐसी स्थिति में प्रक्रिया कैसे पूरी की जाए। इधर, सोमवार की शाम वीरपाल और रामकली देवी के शव गांव बढ़ौली फत्ते खां पहुंचे तो वहां लोगों की भीड़ लग गई। पुलिस ने अपनी मौजूदगी में शवों का अंतिम संस्कार कराया।




