सावन के पवित्र महीने में कांवडिया़ अपनी यात्रा में पूरी तरह से धार्मिकता से चल रहे हैं कहीं कंधे पर इक्यावन लीटर गंगाजल तो कहीं माता पिता और बुजुर्गोंे को गंगा स्नान कराने के बाद उन्हें कांवड में बैठाकर ला रहे है। ऐसा ही नजारा सासनी में रविवार को देखने को मिला। हाथरस के गांव भूतपुरा निवासी राजीवन अपनी बूढी दादी को गंगाजल के साथ कांबड में बैठाकर राजघाट से अपनी यात्रा पूरी कर रहा है। उसकी इस यात्रा से आधुनिक श्रवण कुमार जैसी मातृ-पितृ भक्ति का एक अद्भुत नजारा सामने आया है।
रविवार को सासनी से निकले इस जत्थे में शामिल शिवभक्त राजीव कुमार अपने कंधों पर एक तरफ पवित्र गंगाजल का कलश है और दूसरी तरफ उनकी वृद्ध दादी बैठी हुई हैं। कंधे पर आस्था और जिम्मेदारी का संतुलनकांवड़िया राजीव कुमार ने सोरों (राजघाट) से पवित्र गंगाजल उठाया और अपनी दादी की इच्छा पूरी करने के लिए उन्हें भी कांवड़ में बैठा लिया। राजीव ने एक विशेष कांवड़ तैयार करवाई, जिसमें तराजू की तरह बनी कांबड के एक पलड़े की तरह बनी टोकरी में उनकी वृद्ध दादी बैठी थीं, जबकि दूसरे पलड़े पर गंगाजल का कलश और पूजन सामग्री रखी हुई थी। दोनों ओर का वजन संतुलित कर राजीव अपने कंधों पर इस महाभार को उठाए सासनी के रास्तों से होकर गुजरे। रास्ते में जिसने भी इस दृश्य को देखा, उसने इस अनोखे श्रवण कुमार की भक्ति और सेवा भाव को नमन किया। इस अनोखी कांवड़ को देखने के लिए सासनी से लेकर हाथरस तक सड़कों पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुरक्षा और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए स्थानीय पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही। पुलिस कर्मियों ने सुरक्षा घेरा बनाकर राजीव के जत्थे को सुरक्षित रास्ता मुहैया कराया और उन्हें उनके पैतृक गांव भूतपुरा की ओर रवाना किया।
Author: Sunil Kumar
SASNI, HATHRAS


