यूपी में प्रवर्तन कार्रवाई में गिरफ्तारी का आंकड़ा भी बढ़ा है। 2023-24 में 11 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 19 और 2025-26 में 25 हो गई। तीन वर्षों में कुल 55 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के जरिये जीएसटी चोरी करने वालों पर प्रदेश में कार्रवाई तेज हुई है। वित्त मंत्रालय के राज्यसभा में रखे आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में प्रदेश में 1356 मामलों में 12015 करोड़ की फर्जी आईटीसी पकड़ी गई। इस दौरान 55 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
फर्जी पैन-आधार से बन रही थीं कागजी कंपनियां
सिंडिकेट द्वारा चोरी या जाली पैन और आधार के जरिये फर्जी जीएसटी पंजीकरण हासिल कर कागजों पर कंपनियां खड़ी करने के मामले सामने आए हैं। फर्जी आईटीसी का नेटवर्क लोहा-इस्पात, कपड़ा, प्लास्टिक, कागज, प्लाईवुड, सीमेंट और तांबा जैसे क्षेत्रों से जुड़े मामले सामने आए हैं। सेवाओं में वर्क कॉन्ट्रैक्ट, मैनपावर सप्लाई और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्र भी इसकी चपेट में हैं।
आर्थिक अपराध विशेषज्ञ देवेन्द्र डंग का कहना है कि फर्जी आईटीसी के बढ़ते मामले पकड़ने का मतलब है कि संगठित रूप से जालसाजी करने वालों का सिंडीकेट भी लगातार बढ़ा है। कर विभाग के इस आक्रामक रुख को न्यायपालिका का भी कड़ा समर्थन मिल रहा है। न्यायालय ने इस मामले में स्पष्ट किया कि घोटाले केवल कर चोरी नहीं हैं, बल्कि देश की आर्थिक संप्रभुता पर हमला है। न्यायालय ने आर्थिक अपराधों को क्लास अपार्ट (एक अलग श्रेणी) घोषित करते हुए स्थापित किया कि ऐसे मामलों में सामान्य अपराधों की तरह उदारता नहीं बरती जा सकती।



