
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। श्रावणी श्री शिव महापुराण सप्ताह अमर कथा कबीर आश्रम नगर खेड़ा मोती नगर में आयोजित की जा रही है। कथा के दूसरे दिन आचार्य सनातन चैतन्य ने भगवान सदाशिव के शिवलिंग रूप में प्रकट होने की कथा सुनाई। सूरजप्रकाश गोयल परिवार सहित भक्तों ने व्यास व पोथी पूजन किया, पंडित रवींद्र नाथ तिवारी और देवीप्रसाद भारद्वाज ने मंत्रोच्चार किया।
आचार्य सनातन चैतन्य ने शिवमहापुराण को भगवान शिव का शब्दमय विग्रह बताया। उन्होंने इसे वेदों का सार भी कहा। उन्होंने कथा आगे बढ़ाते हुए कहा कि महाप्रलय में केवल सदाशिव ही थे। उन्होंने अपने दाएं भाग से ब्रह्मा और बाएं अंग से विष्णु को उत्पन्न किया। ब्रह्मा और विष्णु में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। यह विवाद इतना बढ़ा। उनके मध्य एक विशाल ज्योति स्तंभ प्रकट हुआ। दोनों ने इसके आदि और अंत का पता लगाने का निर्णय लिया।
आचार्य सनातन चैतन्य ने शिवमहापुराण को भगवान शिव का शब्दमय विग्रह बताया। उन्होंने इसे वेदों का सार भी कहा। उन्होंने कथा आगे बढ़ाते हुए कहा कि महाप्रलय में केवल सदाशिव ही थे। उन्होंने अपने दाएं भाग से ब्रह्मा और बाएं अंग से विष्णु को उत्पन्न किया। ब्रह्मा और विष्णु में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। यह विवाद इतना बढ़ा। उनके मध्य एक विशाल ज्योति स्तंभ प्रकट हुआ। दोनों ने इसके आदि और अंत का पता लगाने का निर्णय लिया।
ब्रह्मा हंस पर सवार होकर ऊपर गए, जबकि विष्णु वराह रूप में नीचे गए। कई वर्षों के प्रयास के बाद विष्णु ने थाह पाना असंभव मानकर वापसी की। ब्रह्मा ने भी अंत तक पहुंचना असंभव पाया, पर केतकी पुष्प से झूठी गवाही दिलवाई। इस पर ज्योति स्तंभ से भगवान सदाशिव प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्मा के असत्य बोलने वाले पांचवें मुख को काट दिया। सदाशिव ने कहा कि ब्रह्मा की पूजा नहीं होगी, जबकि सत्य का साथ न छोड़ने के कारण विष्णु की पूजा उनके समान होगी और उनका नाम सत्यनारायण होगा।
महाशिवरात्रि और शिवलिंग पूजा का महत्व
आचार्य सनातन चैतन्य ने बताया कि फागुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को यह ज्योति स्तंभ प्रकट हुआ था। इसी दिन को महाशिवरात्रि कहा जाता है। इस दिन ब्रह्मा और विष्णु ने शिवलिंग की पहली पूजा की। उन्होंने इसका अभिषेक भी किया। उन्होंने कहा कि शिवपुराण में शिवलिंग पूजा की बड़ी महिमा बताई गई है। कथा के अंत में आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।
आचार्य सनातन चैतन्य ने बताया कि फागुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को यह ज्योति स्तंभ प्रकट हुआ था। इसी दिन को महाशिवरात्रि कहा जाता है। इस दिन ब्रह्मा और विष्णु ने शिवलिंग की पहली पूजा की। उन्होंने इसका अभिषेक भी किया। उन्होंने कहा कि शिवपुराण में शिवलिंग पूजा की बड़ी महिमा बताई गई है। कथा के अंत में आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।
Author: priya singh
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