भिवानी के पांचों मुक्केबाजों ने शनिवार को ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल मुकाबलों में पांच स्वर्ण पदक जीतकर मिनी क्यूबा कहलाए जाने वाले भिवानी की धरती पर इतिहास रच दिया। साक्षी चौधरी, जैस्मिन लंबोरिया, प्रीति पंवार, प्रिया घनघस और सचिन सिवाच ने अपने-अपने प्रतिद्वंद्वियों को शिकस्त देकर सोने पर सुहागा कर दिया। यह पहला मौका है, जब जिले की चार बेटियों ने एक साथ राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता। पांचों खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक देशवासियों को निराश नहीं होने दिया।
मां बोलीं- बेटी को मेहनत का फल मिला
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय सेना की नायब सूबेदार जैस्मिन लंबोरिया के स्वर्ण पदक जीतते ही परिवार में खुशी का माहौल छा गया। 25 वर्षीय जैस्मिन की यह उपलब्धि उनके माता-पिता के लिए बेहद खास रही। बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली जैस्मिन ने वादा किया था कि इस बार वह पदक का रंग बदलेगी और उसने ऐसा कर दिखाया। खेल प्रेरक राजनारायण पंघाल ने बताया कि जैस्मिन ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार मुक्केबाजी का प्रदर्शन किया। मां जोगिंद्र कौर ने कहा कि जिस लगन से जैस्मिन ने मेहनत की उसका आज फल मिल गया।
Author: priya singh
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