खुलासा हुआ है कि धर्मांतरण कराने वाला गिरोह मोहनलालगंज में 20 साल से सक्रिय है। डेढ़ दशक पहले बच्चों को पढ़ाने के लिए गांव गांव केंद्र खोलकर गिरोह ने उनके परिवारों तक पहुंच बना ली।

मोहनलालगंज में धर्मांतरण मामले में पुलिस ने मंगलवार को भी कुछ लोगों से पूछताछ की। छानबीन में पता चला है कि गिरोह महिलाओं को रोजगार और बच्चों को शिक्षा दिलाने का झांसा देकर उनका ब्रेनवॉश करता था। मोहनलालगंज नगर पंचायत के भोला खेड़ा गांव में 120 से अधिक लोग ऐसे हैं, जो प्रार्थना सभा में शामिल होते हैं।
उधर, सामाजिक कार्यकर्ता श्रवण कुमार गौतम ने हिंदू दलितों को लालच देकर ईसाई बनाए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों का अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त कराया जाना चाहिए।
गांव-गांव केंद्र खोला और शुरू कर दिया खेल
धर्मांतरण कराने वाला गिरोह मोहनलालगंज में 20 साल से सक्रिय है। डेढ़ दशक पहले बच्चों को पढ़ाने के लिए गांव गांव केंद्र खोलकर गिरोह ने उनके परिवारों तक पहुंच बना ली। फिर जरूरतमंदों की मदद के बहाने गरीब तबके में ईसाई धर्म का व्यापक प्रचार-प्रसार कर धर्मांतरण कराना शुरू कर दिया। मामले के खुलासे के बाद पुलिस कई बिंदुओं पर छानबीन कर रही है।
मुफ्त इलाज कराकर झांसे में लिया
ग्रामीणों का कहना है कि गिरोह ने बीमार लोगों का मुफ्त इलाज कराया। खाने-पीने की सामग्री उपलब्ध कराई। इसके बाद झांसे में लेकर उनका धर्म बदलवा दिया। गांव में कई ऐसे परिवार हैं जो अब ईसाई धर्म को मानते हैं। छानबीन में निगोहां, नगराम और गोसाईंगंज में भी गिरोह के लोग सक्रिय मिले हैं। इंस्पेक्टर मोहनलालगंज रामबाबू सिंह ने बताया कि जांच तेजी से चल रही है। सभी तरह के इनपुट एकत्र किए जा रहे हैं। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।