
हरियाणा में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए एमबीबीएस सीटों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस साल राज्य में एमबीबीएस की कुल सीटें बढ़कर 2,960 हो गई हैं, जो इस क्षेत्र के राज्यों में सबसे अधिक हैं। लेकिन इन बढ़ी हुई सीटों का सबसे ज्यादा फायदा निजी मेडिकल कॉलेजों को मिला है। राज्य की कुल 2,960 सीटों में से 1,900 सीटें (करीब 64.2 प्रतिशत) निजी मेडिकल कॉलेजों में हैं, जबकि 1,060 सीटें (करीब 35.8 प्रतिशत) सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हैं। यानी हर तीन मेडिकल सीटों में से लगभग दो सीटें निजी कॉलेजों के पास हैं।
नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी) हर साल नए शैक्षणिक सत्र से पहले देशभर के मेडिकल कॉलेजों और उनकी सीटों का ब्यौरा जारी करता है। ताजा आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में इस बार 250 नई एमबीबीएस सीटें जोड़ी गई हैं, लेकिन ये सभी सीटें निजी मेडिकल कॉलेजों में बढ़ाई गई हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इस साल एक भी नई सीट नहीं बढ़ी है। हालांकि पिछले साल सरकार ने सरकारी मेडिकल शिक्षा का भी विस्तार किया था। उस समय कोरियावास और भिवानी मेडिकल कॉलेज में 100-100 नई सीटें बढ़ाई गई थीं। लेकिन इस बार सरकारी कॉलेजों में सीटें स्थिर रहने से सस्ती मेडिकल शिक्षा के विकल्प नहीं बढ़ पाए हैं। हरियाणा में कुल 18 मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें आठ सरकारी कॉलेज हैं और 10 निजी मेडिकल कॉलेज हैं।
सरकारी में कोर्स की 4.22 लाख और निजी में 1.25 करोड़ की फीस
सरकारी मेडिकल कॉलेज: राज्य सरकार के मुताबिक राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने में करीब चार से पांच लाख रुपये का खर्च आता है। सरकारी मेडिकल कॉलेज में हर साल 80 हजार से एक लाख रुपये का खर्च आता है। इसके अलावा बाकी खर्च आता है।
सरकारी सहायता प्राप्त मेडिकल कॉलेज: सरकारी सहायता प्राप्त मेडिकल कॉलेज फीस के मामले में सरकारी और निजी कॉलेजों के बीच का विकल्प हैं। इन कॉलेजों में वार्षिक फीस करीब ₹1.80 लाख है, जबकि पूरे एमबीबीएस कोर्स का खर्च लगभग ₹8.10 लाख बैठता है। यह सरकारी मेडिकल कॉलेजों से महंगा, लेकिन निजी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में काफी सस्ता विकल्प है।
निजी मेडिकल कॉलेज: डीम्ड यूनिवर्सिटी के तहत संचालित निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई सबसे महंगी है। इन कॉलेजों में फीस करीब ₹54 लाख से लेकर ₹1.25 करोड़ तक हो सकती है, जो कॉलेज के अनुसार अलग-अलग होती है। कई संस्थानों में हर साल फीस भी बढ़ाई जाती है। ऐसे कॉलेजों में छात्रों को औसतन हर साल करीब ₹25 लाख खर्च करने पड़ते हैं, जबकि पूरे एमबीबीएस कोर्स पर करीब ₹1.25 करोड़ तक खर्च आ सकता है। यानी निजी डीम्ड मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई का खर्च सरकारी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में लगभग 30 गुना अधिक है।
मेडिकल कॉलेज सीटें
वर्ल्ड कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च झज्जर 250
आदेश मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल शाहाबाद (कुरुक्षेत्र) 250
फैकल्टी ऑफ मेडिसिन एंड हेल्थ साइंसेज गुरुग्राम 150
महर्षि मार्कंडेश्वर कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सादोपुर 150
महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च मुलाना (अंबाला) 200
अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर फरीदाबाद 200
अमृता स्कूल ऑफ मेडिसिन 150
महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज अग्रोहा (हिसार) 100
एन.सी. मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल पानीपत 200
संस्कारम स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज 100
सरकारी मेडिकल कॉलेज और एमबीबीएस सीटें
क्रम मेडिकल कॉलेज सीटें
1 महर्षि च्यवन राजकीय मेडिकल कॉलेज, कोरियावास 100
2 कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) मेडिकल कॉलेज, फरीदाबाद 150
3 बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज, सोनीपत 120
4 कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज, करनाल 120
5 पंडित नेकी राम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज, भिवानी 100
6 पंडित भगवत दयाल शर्मा स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (पीजीआईएमएस), रोहतक 250
7 शहीद हसन खान मेवाती राजकीय मेडिकल कॉलेज, नल्हड़ (नूंह) 120
8 श्री अटल बिहारी वाजपेयी राजकीय मेडिकल कॉलेज, फरीदाबाद 100
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीटें बढ़ाने का सीधा ताल्लुक राज्य के स्वास्थ्य बजट से है। स्वास्थ्य बजट बढ़ेगा, तभी सरकारी मेडिकल काॅलेज में सीटें बढ़ेगी, क्यों कि मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीटों के लिए काफी इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होती है। मेडिकल कॉलेज में सभी जरूरी कोर्स होने चाहिए। प्रयोगशाला के साथ पूरी फेकल्टी होनी चाहिए। प्राइवेट कॉलेज में वही बच्चा जाएगा, जिसके पास नंबर कम होंगे मगर पैसा भरपूर। जो मेधावी बच्चे हैं, उनमें प्रतिस्पर्धा भी काफी होती हैं। ऐसे में उनके पास विकल्प कम हैं और उन्हें ज्यादा मेहनत भी करनी पड़ती है। -डा. अरविंद गोयल, मेडिकल एजुकेशन विशेषज्ञ, चंडीगढ़।
Author: priya singh
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