
इसमें केवल पुरस्कार राशि बढ़ाने की बजाय खिलाड़ियों को बचपन से तैयार करने, ग्रेडेशन व्यवस्था बदलने और सरकारी नौकरियों के नियमों में संशोधन जैसे बड़े बदलाव किए जा रहे हैं।
सबसे बड़ा बदलाव
सबसे बड़ा बदलाव खेल नीति से योग शब्द हटाकर योगासन को खेल विधा के रूप में शामिल करना माना जा रहा है। इससे योगासन प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को भी अन्य खेलों की तरह नीति का लाभ मिलेगा। साथ ही ग्रेडेशन नीति में भी व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं। अब केवल मान्यता प्राप्त और उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन को प्राथमिकता मिलेगी। सरकारी नौकरी के लिए पात्रता और चयन प्रक्रिया को भी अधिक स्पष्ट बनाया जाएगा।
इनाम नहीं निवेश पर फोकस
नई नीति का पूरा फोकस इनाम नहीं निवेश पर रखा गया है। सरकार की योजना 8 से 10 वर्ष की उम्र में ही प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान कर उन्हें वैज्ञानिक, आधुनिक और दीर्घकालिक प्रशिक्षण देने की है, ताकि भविष्य के ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों की मजबूत शृंखला तैयार हो सके। नई नीति का उद्देश्य केवल पदक जीतने वालों को सम्मानित करना नहीं बल्कि गांव-गांव से प्रतिभाओं को खोजकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है। इसी सोच के तहत खेल नर्सरी, उत्कृष्टता केंद्र और आधुनिक प्रशिक्षण प्रणाली को भी मजबूत किया जाएगा।
ये होंगे बड़े बदलाव
– योग की जगह योगासन को खेल विधा के रूप में शामिल किया जाएगा।
– 8-10 वर्ष की उम्र से प्रतिभाओं की पहचान कर लंबी अवधि का प्रशिक्षण मिलेगा।
– ग्रेडेशन प्रणाली को प्रदर्शन और मान्यता प्राप्त प्रतियोगिताओं से जोड़ा जाएगा।
– सरकारी नौकरी के नियम अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित होंगे।
– खेलो हरियाणा एप से खिलाड़ियों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन रहेगा।
– डोपिंग पर सख्त कार्रवाई और पैरा खिलाड़ियों को समान अवसर मिलेंगे।
– खेल नर्सरी, उत्कृष्टता केंद्र और खेल संघों की जवाबदेही को मजबूत किया जाएगा।
खेल नीति में खिलाड़ियों के हितों का विशेष ध्यान रखते हुए कई अहम बदलाव किए गए हैं। इनमें योगासन को शामिल कर खिलाड़ियों को सरकार बड़ा तोहफा देने जा रही है ताकि योग को और तेजी से विस्तार मिले। खिलाड़ियों के अन्य मांगों, सुविधाओं, पारदर्शिता और पदक जीतने पर फोकस है। – गौरव गौतम, खेल राज्य मंत्री
