11 साल, 8 एसआईटी और 3 सरकारें: बरगाड़ी में बेअदबी से शुरू हुआ विवाद आज भी अधूरा, चुनाव से पहले गरमाया मामला

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बरगाड़ी बेअदबी कांड और उसके बाद बहिबल कलां गोलीकांड का मामला हर विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन जाता है। सभी सरकारें दोषियों को सजा दिलाने का दावा करती हैं लेकिन आज तक इंसाफ नहीं मिल पाया है।

The Congress government has decided to restore students' union elections in  all higher education institutions from the academic year beginning in June,  a move which was banned by its own party in

श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और बहिबल कलां गोलीकांड पंजाब के सबसे संवेदनशील मामलों में शामिल हैं। अक्तूबर 2015 की घटना के 11 साल बाद भी दो प्रदर्शनकारियों के परिजनों को इंसाफ नहीं मिल सका है। इस दौरान प्रदेश में तीन मुख्यमंत्री बदल गए।

मामले की जांच के लिए आठ बार विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित हुआ और जस्टिस रणजीत सिंह आयोग ने भी जांच की। आठ पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ चालान पेश हुए लेकिन अब तक किसी को सजा नहीं मिली।

हर चुनाव से पहले उठता है मुद्दा

हर विधानसभा चुनाव से पहले यह मामला बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता रहा है। सभी सरकारें दोषियों को सजा दिलाने का दावा करती रही हैं। अब चुनाव में करीब छह माह शेष हैं तो मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार ने डीआईजी हरजीत सिंह की अगुवाई में नई एसआईटी बनाई है। सरकार का दावा है कि जांच में कुछ नए तथ्य सामने आए हैं।

नई एसआईटी ने हाल में घटनास्थलों का दोबारा दौरा कर घटनाक्रम का पुनर्निर्माण किया। टीम तत्कालीन गृह मंत्री समेत कई लोगों से पूछताछ कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि गोली चलाने का अंतिम आदेश किसने दिया था। एसआईटी ने स्थानीय लोगों से पहचान गोपनीय रखने का भरोसा देकर बयान देने की अपील भी की है। जांच के साथ मामला फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

क्या था पूरा मामला

दो जून 2015 को फरीदकोट के बुर्ज जवाहर सिंह वाला गांव से श्री गुरु ग्रंथ साहिब का स्वरूप चोरी हो गया। 25 सितंबर को आपत्तिजनक पोस्टर मिले और 12 अक्तूबर को बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 110 से अधिक फाड़े गए अंग बरामद हुए। विरोध प्रदर्शन के दौरान 14 अक्तूबर को कोटकपूरा और बहिबल कलां में पुलिस कार्रवाई हुई। बहिबल कलां में हुई फायरिंग में कृष्ण भगवान सिंह और गुरजीत सिंह की मौत हो गई।

बरगाड़ी बेअदबी, कोटकपूरा लाठीचार्ज और बहिबल कलां फायरिंग से जुड़े मामलों में सात एफआईआर दर्ज हुईं। जांच के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, तत्कालीन उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री सुखबीर सिंह बादल, तत्कालीन डीजीपी सुमेध सिंह सैनी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आए। अदालतों के निर्देश पर कई बार एसआईटी का पुनर्गठन भी हुआ।

सरकार दोषियों को सजा दिलाने के बजाय मामले को राजनीतिक रूप से जिंदा रखना चाहती है। -अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, प्रदेशाध्यक्ष, कांग्रेस बेअदबी और फायरिंग अकाली-भाजपा सरकार के समय हुई। जांच का उद्देश्य पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाना है। -हरपाल सिंह चीमा, वित्त मंत्री, पंजाब सरकार

 

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Author: Farheen

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