Karnal: एसी मैकेनिक का बेटा बनेगा डॉक्टर, नीट में पहले ही प्रयास में ईडब्ल्यूएस श्रेणी में देशभर में 8वां रैंक

Picture of priya singh

priya singh

SHARE:

करनाल इंटरनेशनल स्कूल के कक्षा 12वीं के छात्र ऋतिक ने बताया कि उन्होंने जेनेसिस क्लासिस के मार्गदर्शन में आठवीं कक्षा से ही मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। वर्षों की निरंतर मेहनत, अनुशासन और परिवार के त्याग का ही यह परिणाम है।
Son of an AC mechanic from Karnal to become a doctorAIR 8 in the EWS category in NEET on his first attempt

सपनों की उड़ान के लिए ऊंची आर्थिक हैसियत नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की जरूरत होती है। इसे कर्ण नगरी के छात्र ऋतिक राज ने साबित कर दिखाया है। दिल्ली में एसी मैकेनिक का काम करने वाले पिता के बेटे ऋतिक ने पहले ही प्रयास में नीट परीक्षा में 685 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 206 और जनरल ईडब्ल्यूएस श्रेणी में देशभर में आठवां रैंक प्राप्त किया है। अब उनका लक्ष्य देश के प्रतिष्ठित एम्स, नई दिल्ली में दाखिला लेकर कार्डियोलॉजिस्ट बनना है।

मूल रूप से बिहार के छपरा निवासी ऋतिक का परिवार वर्षों से बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर संघर्ष कर रहा है। पिता धीरज कुमार दिल्ली में एसी मैकेनिक के रूप में काम करते हैं, जबकि मां सचिता देवी गृहिणी हैं। परिवार में अब तक कोई डॉक्टर नहीं बना है। ऋतिक कहते हैं कि वह अपने परिवार के पहले डॉक्टर बनेंगे और समाज की सेवा करेंगे। डॉक्टर को भगवान का दर्जा और इस प्रोफेशन में मिलने वाली इज्जत उनके कदम इस तरफ़ बढ़ाए हैं।

इस सफलता की कहानी सिर्फ मेहनत की नहीं, बल्कि भावनात्मक संघर्ष से उबरने की भी है। ऋतिक ने बताया कि तीन मई को होने वाली नीट परीक्षा से महज 15 दिन पहले उनके दादा ललन सिंह का निधन हो गया था। इस वजह से उन्हें पूरे परिवार के साथ बिहार जाना पड़ा। पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हुई और मानसिक रूप से भी वह टूट गए।
दो मई को करनाल लौटने के बाद अगले ही दिन उन्होंने परीक्षा दी। उस समय उनकी तैयारी के आधार पर करीब 680 अंक आए।हालांकि बाद में परीक्षा रद्द होने से उन्हें दोबारा तैयारी का अवसर मिला। दादा के निधन के दुख से धीरे-धीरे बाहर निकलकर उन्होंने पूरी एकाग्रता से पढ़ाई की। अतिरिक्त समय का भरपूर उपयोग किया और आखिरकार 685 अंकों के साथ शानदार सफलता हासिल कर ली।
चार साल पहले शुरू की थी मेहनत 
करनाल इंटरनेशनल स्कूल के कक्षा 12वीं के छात्र ऋतिक ने बताया कि उन्होंने जेनेसिस क्लासिस के मार्गदर्शन में आठवीं कक्षा से ही मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। वर्षों की निरंतर मेहनत, अनुशासन और परिवार के त्याग का ही यह परिणाम है। उनकी सफलता उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं। उनका कहना है कि मेहनत जारी रखनी चाहिए। कई बाधाएं आती हैं पर सफलता जरूर मिलती है। 

priya singh
Author: priya singh

The Voice behind the Mic. The Pen behind the Truth. 👑 🎙️ News Anchor | Digital Scribe 🖋️ Crafting perspectives, delivering facts, and documenting history in black & white. 🏛️ Where eloquence meets hard-hitting journalism. 👇 Read the untold stories below.

सबसे ज्यादा पड़ गई