‘पिता मुख्यमंत्री हैं, तभी काम मिलता है’, रितेश देशमुख को इंडस्ट्री से मिले थे ताने; एक्टर ने साझा किया किस्सा

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Riteish Deshmukh: लॉक अप के हालिया एपिसोड में रितेश देशमुख ने करियर की शुरुआत में बॉलीवुड से मिले ताने और टैग्स के बारे में बात की। जानिए उन्होंने क्या कुछ बताया…
Riteish Deshmukh On Industry Labels Post Bollywood Debut I Was Told My Films Worked Because My Father Was CM

बॉलीवुड एक्टर रितेश देशमुख आजकल नेटफ्लिक्स के रियलिटी शो ‘लॉक अप: सच या सजा’ को होस्ट कर रहे हैं। शो पर हाल ही में रितेश ने फिल्म इंडस्ट्री में आने पर मिले लेबल्स और लोगों की सोच से उबरने के बारे में खुलकर बात की। शो के लेटेस्ट एपिसोड में कंटेस्टेंट्स के साथ हुई बातचीत के दौरान एक्टर ने महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री के बेटे होने के टैग और खुद को साबित करने में बिताए कई साल के बारे में बात की।

सच्चाई जाने बिना दुनिया ने धारणा बना ली
एक टास्क से पहले कंटेस्टेंट योगेश रावत ने बताया कि कंगना रनौत के उन्हें चीटर कहने से उन्हें कितना दुख हुआ, जबकि उन्हें उनकी पूरी कहानी पता भी नहीं थी। योगेश ने कहा, ‘उन्हें यह भी नहीं पता कि मुझ पर सिर्फ आरोप लगा है या यह सच भी है। मैं इस बात को उठाना भी नहीं चाहता क्योंकि यह मेरे लिए बहुत दर्दनाक अनुभव था।

लोगों ने इसे बार-बार दोहराकर सच मान लिया है, जबकि ऐसा नहीं है। मुझे नहीं लगता कि यह सही है कि पूरी सच्चाई जाने बिना दुनिया ने एक धारणा बना ली है। अब जब मैं इस शो का हिस्सा हूं, तो एक गेस्ट मुझे चीटर कह रहा है।
पिछली बार, जब मैंने शो में आकांक्षा को छोड़ने की गलती की थी, तो मेरी मां ने मुझसे कहा था, ‘मैं हमेशा सिर उठाकर चलती थी, लेकिन अब तुम्हारी कहानी की वजह से मुझे शर्मिंदगी महसूस होती है।’

 

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मुझ पर भी लगे टैग, तोड़ने में लगे 23 साल और 60 फिल्में
योगेश की बात का जवाब देते हुए रितेश ने बताया कि मेहमान सिर्फ दर्शकों की सोच को दिखाते हैं और उसी सोच को घर के अंदर लाते हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘सोच या धारणा वैसी ही बनती है जैसा आप बाहर दिखाते हैं। हम सभी इस दौर से गुजरे हैं। जब मैंने अपनी पहली फिल्म की थी, तब मेरे पिता महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे।

जब मैंने शुरुआत की, तो सब कहते थे, ‘इनके पिता मुख्यमंत्री हैं, इसलिए इन्हें काम मिलता है और इसलिए इनकी फिल्में अच्छा करती हैं।’ मैं भी इस दौर से गुजरा हूं। तेईस साल और 60 फिल्मों के बाद आज मैं उन सभी टैग्स को तोड़कर आपके सामने खड़ा हूं। कुछ ठप्पों को तोड़ने में समय और मेहनत लगती है, लेकिन अगर आप ठान लें, तो वे टूट ही जाते हैं।’

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Author: priya singh

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