पंजाब में सामान्य तौर पर 175 से 180 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद होती रही है लेकिन पिछले खरीफ सीजन में यह घटकर 152 लाख मीट्रिक टन रह गई थी। वहीं रबी सीजन में गेहूं का उत्पादन भी प्रभावित हुआ था।

पंजाब में जून माह के दौरान सामान्य से कम बारिश होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। इस वर्ष जून में पिछले साल के मुकाबले 59.42 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है।
इस बार बारिश सामान्य औसत से भी कम रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में भी यही स्थिति बनी रही तो धान की पैदावार पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसके साथ ही मक्का और मूंग की फसल भी प्रभावित होने की आशंका है।
मौसम विभाग के अनुसार जून 2025 में प्रदेश में 69.2 मिमी बारिश दर्ज की गई थी जबकि इस वर्ष अब तक केवल 28.3 मिमी वर्षा हुई है। यह सामान्य औसत 46.2 मिमी से 17.9 मिमी कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो धान की पैदावार में 25 से 30 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। इससे पिछले वर्ष की तरह इस बार भी धान खरीद का लक्ष्य अधूरा रह सकता है।
प्रदेश में एक जून से चरणबद्ध तरीके से धान की रोपाई शुरू की गई थी ताकि सिंचाई के लिए पानी की मांग का बेहतर प्रबंधन किया जा सके। हालांकि कम बारिश के कारण खेतों में पानी की कमी बनी हुई है जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
बिजली संकट ने बढ़ाई मुश्किल
किसानों के सामने इस बार दोहरी चुनौती है। धान की रोपाई के दौरान सरकार की ओर से आठ घंटे बिजली आपूर्ति का प्रावधान है ताकि ट्यूबवेलों से सिंचाई हो सके। लेकिन बढ़ती बिजली मांग के कारण कई जिलों में किसानों को केवल चार घंटे ही बिजली मिलने की शिकायत है। इससे सिंचाई प्रभावित हो रही है। प्रदेश में बिजली की मांग इस बार रिकॉर्ड 16,844 मेगावाट तक पहुंच गई है।