राम मंदिर चंदे पर डाका: 11 माह में 83 करोड़ का दान, सुरक्षा पर 10 करोड़ खर्च, फिर भी चोरी; चौंकाने वाले तथ्य

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राम मंदिर की दान राशि में चोरी की जांच के बीच ट्रस्ट के वित्तीय दस्तावेजों से कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने सुरक्षा व्यवस्था और वित्तीय निगरानी को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर 11 माह में करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसी अवधि में दान पेटियों से चोरी की गई।

Ayodhya Ram Mandir Donation scam Around 10 crore spent on security over 11 month yet thefts continued to occur

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की दान राशि में गड़बड़ी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आने की चर्चा तेज होती जा रही है। जांच के तीसरे दिन एसआईटी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उसकी पड़ताल केवल धनराशि के कथित गबन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रशासनिक, प्रबंधकीय और निगरानी तंत्र की गहन समीक्षा की जा रही है। 

सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान कई ऐसे बिंदु सामने आए हैं जिनकी अब तक सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं हुई थी। इन्हीं तथ्यों के आधार पर एसआईटी अब यह समझने का प्रयास कर रही है कि आखिर ऐसी परिस्थितियां कैसे बनीं, जिनमें अनियमितताओं को अंजाम दिया गया। हालांकि वे चौंकाने वाले तथ्य क्या हैं, ये अब तक पता नहीं चल सके हैं। लेकिन सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी दान संग्रह, धनराशि की गणना, रख-रखाव, निगरानी और रिपोर्टिंग से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

कौन था जिम्मेदार, कहां हुई चूक 
एसआईटी की जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जवाबदेही तय करना माना जा रहा है। जांच की दिशा से यह साफ है कि एसआईटी अब केवल यह नहीं पूछ रही कि किसने किया, बल्कि उससे बड़ा सवाल तलाश रही है-यह संभव कैसे हुआ। यही सवाल आने वाले दिनों में कई चौंकाने वाले खुलासों का आधार बन सकता है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित अनियमितताओं के पीछे किसी व्यक्ति विशेष की भूमिका अधिक थी या फिर व्यवस्थागत कमजोरियों ने इस स्थिति को जन्म दिया। इसी कारण पूरी प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था को जांच के दायरे में रखा गया है।

सुरक्षा पर 10 करोड़ खर्च, फिर भी होती रही चोरी
राम मंदिर की दानराशि गड़बड़ी प्रकरण की जांच के बीच ट्रस्ट के वित्तीय दस्तावेजों से कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने सुरक्षा व्यवस्था और वित्तीय निगरानी को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेजों के अनुसार मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर 11 माह में करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसी अवधि में दान पेटियों से चोरी और दानराशि में गड़बड़ी का मामला सामने आ गया। 

जानकारी के अनुसार, 21 मार्च को हुई ट्रस्ट की बैठक में एक अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 तक की आय-व्यय का ब्योरा प्रस्तुत किया गया था। इसी विवरण में सुरक्षा मद पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है। मंदिर परिसर में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे, निजी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती के बावजूद दान पेटियों से कथित धन और आभूषणों की चोरी का मामला सामने आने के बाद अब सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

11 माह में मिला 83 करोड़ का दान
ट्रस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 11 माह के दौरान ट्रस्ट को विभिन्न माध्यमों से लगभग 83 करोड़ दान में मिले। इसमें पेटियों से 55 करोड़, काउंटरों से 18 करोड़, ऑनलाइन 8 करोड़, विदेशी श्रद्धालुओं से 78 लाख व अन्य स्रोतों से 1.22 लाख प्राप्त हुए।

पूर्व डीजीपी बोले… ये आपराधिक हो रिपोर्ट कृत्य, तत्काल दर्ज
दान की राशि गबन करने के मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। प्रदेश के कई पूर्व डीजीपी का कहना है कि ये गंभीर आपराधिक कृत्य है। इसमें तत्काल केस दर्ज करना चाहिए। यही मांग आज देश की जनता भी कर रही है।

सीबीआई जांच हो, दोषियों को ऐसा दंड मिले जो नजीर बने: विक्रम सिंह 
पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने कहा, रोजाना लाखों- करोड़ों का दान आता है। बताया जाता है कि सोना-चांदी, रत्न व हीरे जड़े आभूषण भी प्राप्त हुए हैं। ये सामान्य अपराध नहीं है बल्कि महापाप है। मंदिर संचालन और दान प्रबंधन में जिस दक्षता व पारदर्शिता की आवश्यकता थी, वह दिखाई नहीं देती। एसआईटी का गठन किया गया है। इस मामले में अपराध पंजीकृत किया जाना चाहिए। मेरी राय में जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए। करीब 300-400 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद मंदिर निर्माण हुआ है। ऐसे ऐतिहासिक व पवित्र स्थल में यदि सेंधमारी या वित्तीय अनियमितता हुई है तो दोषियों की पहचान कर उन्हें ऐसा दंड दिया जाना चाहिए, जो नजीर बने।

मंदिर की छवि खराब हुई, सख्त कार्रवाई की जरूरत: एके जैन
पूर्व डीजीपी एके जैन ने कहा कि दान राशि के गबन का जो मामला सामने आया है, वह एक आपराधिक घटना है। इसमें केस दर्ज होना चाहिए। जांच में जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर जेल भेजा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए मंदिर प्रशासन के साथ पुलिस व अन्य एजेंसियों की बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई जाए। इस प्रकरण से छवि प्रभावित हुई है, इसलिए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है। केस दर्ज कर विवेचना के लिए मुख्यालय स्तर से आईपीएस और एएसपी अधिकारियों वाली एसआईटी गठित करने की जानी चाहिए।

सीबीआई जांच की पीआईएल पर आज होगी सुनवाई
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन मामले में उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई होनी है। याचिका में मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से लेखा परीक्षा कराने का भी आग्रह किया गया है। यह जनहित याचिका बीते शुक्रवार को उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में दाखिल हुई थी। यह याचिका 18 जून की वाद सूची में क्रमांक 466 पर सूचीबद्ध है। न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ इसकी सुनवाई करेगी।

एसआईटी को मिले सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ के सुबूत, टिन्नू से लंबी पूछताछ
श्रीराम मंदिर की दान की राशि में हेरफेर के मामले में एसआईटी (विशेष जांच दल) की तफ्तीश तीसरे दिन बुधवार को भी जारी रही। जांच में ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिससे आशंका है कि सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की गई थी ताकि रकम पार कर सुबूत मिटाए जा सकें। हालांकि, अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

वहीं, निगरानी करने वाले असल जिम्मेदार एसआईटी के सवालों के जवाब नहीं दे पा रहे हैं। जांच टीम ने रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से भी लंबी पूछताछ की है। एसआईटी की टीम सोमवार से अयोध्या में डेरा डाले है। पहले दिन करीब साढ़े सात घंटे और मंगलवार को 11 घंटे मंदिर परिसर में रहकर टीम ने जांच की थी। बुधवार को भी जांच का सिलसिला जारी रहा।

सुबह करीब दस बजे एसआईटी की टीम मंदिर परिसर पहुंची। जहां ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत अन्य कई पदाधिकारी, कर्मचारी, पुजारी और बैंक कर्मी मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक, टीम ने सीसीटीवी कैमरों की स्थिति को गहनता से परखा। इसमें कुछ ऐसे तथ्य मिले हैं जिससे आशंका है कि चोरी करने वालों ने फुटेज से छेड़छाड़ की है।

सवालों में फंस रहे जिम्मेदार
एसआईटी चंपत राय, गोपाल राव समेत राममंदिर ट्रस्ट के कई अन्य पदाधिकारियों व उनसे जुड़े लोगों से गहनता से पूछताछ कर रही है। सूत्रों के मुताबिक ये लोग कई सवालों के जवाब नहीं दे पा रहे हैं। कई सवालों के गोलमोल जवाब दे रहे हैं।

  • दान के दिए गए रिकॉर्ड से भी एसआईटी संतुष्ट नहीं है क्योंकि उसमें कई चीजें अस्पष्ट हैं। इसलिए एसआईटी को जांच में समय लग रहा है। विशेष जांच दल ने पूछताछ के लिए करीब दो सौ लोगों की सूची तैयार की है। इनमें से सवा सौ लोगों से पूछताछ कर चुकी है। इनमें से कुछ से कई बार पूछताछ की है।
  • सवाल : कब दर्ज होगी एफआईआर
    पकड़े गए पांच संदिग्धों से भी एसआईटी ने पूछताछ की है। उनके पास से रकम भी बरामद हुई थी। सूत्रों के मुताबिक इन संदिग्धों ने कई नामों का खुलासा किया है जिनको इस खेल में शामिल बताया है। जांच टीम अब इनके बयानों की तस्दीक कर रही है। अब सवाल है कि क्या एसआईटी की जांच के बीच एफआईआर दर्ज कराई जाएगी या जांच पूरी होने के बाद। इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई भी जाएगी या नहीं… ये सवाल अभी बना हुआ है।

 

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Author: ILMA NEWSINDIA

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