रमेश चंदर ने विदेश सेवा में रहते हुए भारत का प्रतिनिधित्व कई महत्वपूर्ण देशों में किया। वह बेलारूस में भारत के राजदूत रहे। इसके अलावा जापान में भारत के काउंसलर, ब्रिटेन के एडिनबर्ग में भारत के महावाणिज्यदूत और प्राग स्थित भारतीय दूतावास में मंत्री के पद पर भी रहे।

पंजाब में एसआईआर के घेरे में एक और पूर्व राजदूत आ गए हैं। 75 साल के पूर्व राजनयिक रमेश चंदर को जालंधर में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान अपनी पात्रता और नागरिकता से जुड़े अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया गया है। चंदर बेलारूस में भारत के राजदूत रह चुके हैं और जापान, ब्रिटेन तथा चेक गणराज्य में भी भारत के महत्वपूर्ण राजनयिक पदों पर सेवाएं दे चुके हैं।
चंदर के लिए यह स्थिति इसलिए भी हैरान करने वाली है क्योंकि उनका जन्म और पालन-पोषण जालंधर में हुआ। उच्च शिक्षा भी उन्होंने जालंधर से हासिल की और दिसंबर 2010 में सेवानिवृत्ति के बाद पिछले करीब 15 वर्षों से जालंधर में ही रह रहे हैं।
चंदर के मुताबिक पंजाब में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण में वर्ष 2003 की मतदाता सूची को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। लेकिन वर्ष 2003 में वह जापान में भारत की राजनयिक जिम्मेदारी निभा रहे थे। ऐसे में उनका नाम और विवरण उस समय की स्थानीय मतदाता सूची में नहीं होना स्वाभाविक है।
उनका कहना है कि इसी वजह से उनके वर्तमान दस्तावेजों और पुराने अभिलेखों के बीच मेल नहीं बैठ रहा है। चंदर ने कहा कि उन्होंने पूर्व राजदूत नवदीप सूरी के मामले के बारे में पढ़ा था। लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि कुछ ही समय बाद वह खुद ऐसी ही स्थिति में खड़े होंगे।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रमेश चंदर ऐसे दूसरे पूर्व भारतीय राजदूत हैं, जिन्हें विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान नागरिकता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देने को कहा गया है। इससे पहले पूर्व भारतीय राजदूत नवदीप सूरी को भी इसी तरह का नोटिस मिला था। सूरी अमृतसर में रहते हैं और पंजाबी के प्रसिद्ध उपन्यासकार नानक सिंह के पोते हैं।
सूरी ने अपने अनुभव को सार्वजनिक करते हुए सवाल उठाया था कि जब विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व राजदूत को अपनी नागरिकता साबित करने की प्रक्रिया कठिन लग सकती है, तो सामान्य नागरिकों की स्थिति क्या होगी। सूरी के मुताबिक 2003 के अभिलेखों में उनके विवरण से संबंधित विसंगतियां मिलने के बाद उनसे दस्तावेज मांगे गए। उनका कहना था कि वह वर्ष 2003 में भारत में मौजूद ही नहीं थे, बल्कि लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में तैनात थे।
जालंधर के उपायुक्त वरजीत वालिया ने पूरे मामले को नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। उनका कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं का पंजीकरण नहीं हुआ है या जिनके कानूनी विवरण में कोई विसंगति है, उनके दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालय बुलाने के बजाय बूथ स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आवश्यक दस्तावेज घर से ही एकत्र किए जाएं।