अशोक खेमका, 1991 बैच के हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं। वर्ष 2010 में उन्हें केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव स्तर के लिए एम्पैनल किया गया था। वर्ष 2019 में उनके बैच के अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर पर एम्पैनल कर दिया गया, लेकिन खेमका को यह लाभ नहीं दिया गया।

हरियाणा के चर्चित और बेबाक छवि वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के आदेशों को रद्द करते हुए कहा है कि अशोक खेमका को भी अतिरिक्त सचिव/सचिव स्तर पर केंद्र सरकार में एम्पैनल अधिकारियों के समान माना जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब समान परिस्थितियों वाले कई अन्य आईएएस अधिकारियों को नियमों में छूट देकर यह लाभ दिया जा चुका है, तब खेमका को इससे वंचित रखना संविधान के समानता के सिद्धांत के विपरीत है।
अशोक खेमका, 1991 बैच के हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं। वर्ष 2010 में उन्हें केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव स्तर के लिए एम्पैनल किया गया था। वर्ष 2019 में उनके बैच के अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर पर एम्पैनल कर दिया गया, लेकिन खेमका को यह लाभ नहीं दिया गया। केंद्र सरकार का तर्क था कि उन्होंने केंद्र में उप सचिव या उससे ऊपर के पद पर न्यूनतम तीन वर्ष की प्रतिनियुक्ति नहीं की, जो अतिरिक्त सचिव स्तर के एम्पैनलमेंट के लिए आवश्यक शर्त है।
इस निर्णय को खेमका ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में चुनौती दी थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिलने पर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में खेमका ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने अतीत में कई अधिकारियों को इस शर्त में छूट देकर अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर पर एम्पैनल किया है। इसलिए उनके मामले में अलग रवैया अपनाना भेदभावपूर्ण है।
