सचेत ऐप पर अलीगढ़ सहित प्रदेश के 14 जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया जिसके बाद दोपहर में प्रशासन ने जिले के लिए चेतावनी संदेश जारी किया। इसका उद्देश्य लोगों को संभावित खतरे से पहले सतर्क करना था। कई लोगों ने पहली बार इस तरह का इमरजेंसी अलर्ट अपने मोबाइल पर देखा।

अलीगढ़ में 29 मई शाम करीब साढ़े पांच बजे अचानक हर किसी के फोन एक साथ बज उठे। तेज बीप-बीप की आवाज सुनकर लोग चौंक गए। वाइब्रेशन के साथ स्पीकर पर चेतावनी सुनाई देने लगी। करीब पांच से छह सेकेंड तक लोग समझ नहीं पाए कि आखिर यह आवाज कहां से आ रही है। लोगों ने जल्दबाजी में जेब और बैग से मोबाइल निकाले तो स्क्रीन पर मौसम विभाग का इमरजेंसी अलर्ट दिखाई दिया। संदेश में अगले तीन घंटे के भीतर आंधी, बारिश और 60 से 90 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई थी, हालांकि इसी तरह का संदेश एक दिन पहले बृहस्पतिवार को भी प्रशासन ने जारी किया जिसके बाद देर शाम मौसम बिगड़ा लेकिन इस तरह फोन पर संदेश नहीं प्राप्त हुआ।
रात होते-होते मौसम विभाग की चेतावनी सच साबित हुई। शहर से लेकर तहसीलों के कई हिस्सों में तेज आंधी और बारिश शुरू हो गई। बारिश के साथ हवाओं की तेज गति से जहां खिड़की और दरवाजों की आवाजें आने का सिलसिला शुरू हुआ। वहीं दूसरी ओर संचार उपकरणों के सिग्नल ठप पड़ लगने लगे। घरों में टेलीविजन पर सिग्नल लॉस होने का संदेश आने लगा। मोबाइल फोन पर कॉल ड्रॉप होने लगे। यहां तक कि वाईफाई नेटवर्किंग भी प्रभावित रही। करीब 20 से 30 मिनट तक यह स्थिति बनी रही।
सचेत ऐप ने 14 जिलों को अलर्ट किया
जिला प्रशासन के अनुसार, सचेत ऐप पर अलीगढ़ सहित प्रदेश के 14 जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया जिसके बाद दोपहर में प्रशासन ने जिले के लिए चेतावनी संदेश जारी किया। इसका उद्देश्य लोगों को संभावित खतरे से पहले सतर्क करना था। कई लोगों ने पहली बार इस तरह का इमरजेंसी अलर्ट अपने मोबाइल पर देखा। सोशल मीडिया पर भी देर रात तक इस अलर्ट के स्क्रीनशॉट और वीडियो वायरल होते रहे। प्रशासन का दावा है कि भविष्य में इस तरह की चेतावनी प्रणाली लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने और नुकसान कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
आंधी में क्यों गायब हो जाते हैं सिग्नल?
डिश टीवी सीधे उपग्रह से सिग्नल प्राप्त करता है। घने बादल, बारिश और आंधी रेडियो तरंगों को कमजोर कर देते हैं। इसे तकनीकी भाषा में रेन फेड कहा जाता है। मोबाइल टावरों पर बिजली और नेटवर्क दबाव बढ़ने से कॉल ड्रॉप की समस्या आती है। तेज हवाओं से एंटेना और ट्रांसमिशन सिस्टम भी प्रभावित हो सकते हैं।