पूर्व प्रेमी से एक मुलाकात व्यभिचार नहीं, पुराने रिश्ते को शादी के बाद का अवैध संबंध नहीं कह सकते

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याची पति भारतीय नौसेना में कार्यरत है और दंपत्ति का विवाद 16 नवंबर 2021 को हुआ था। पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी शादी के बाद भी दूसरे व्यक्ति के संपर्क में थी। पत्नी झगड़ालू स्वभाव की थी, देर रात घर लौटती थी।

High Court single meeting with ex lover not constitute adultery

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसले में यह स्पष्ट किया है कि किसी महिला का पूर्व प्रेमी से एक बार मिलना मात्र व्यभिचार (अवैध संबंध) साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

अदालत ने कहा कि शादी से पहले किसी व्यक्ति के साथ संबंध होने भर से यह नहीं माना जा सकता कि विवाह के बाद भी वही संबंध व्यभिचार की श्रेणी में आता है।

अदालत ने कहा कि पत्नी का 11 जनवरी 2023 को उस व्यक्ति से अकेले मिलना, जिसके साथ उसका विवाह से पहले कथित संबंध था, केवल एक घटना है और इसे व्यभिचार में रहना नहीं कहा जा सकता। पीठ ने कहा कि शादी से पहले का संबंध अपने आप में पति के प्रति व्यभिचार का अपराध नहीं बन जाता।

मामले में पति भारतीय नौसेना में कार्यरत है और दंपत्ति का विवाद 16 नवंबर 2021 को हुआ था। पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी शादी के बाद भी दूसरे व्यक्ति के संपर्क में थी। पत्नी झगड़ालू स्वभाव की थी, देर रात घर लौटती थी, उसके साथ एक ही बिस्तर पर सोने से इनकार करती थी और लंबे समय तक मोबाइल पर अजनबियों से बातचीत करती रहती थी। पत्नी शादी से पहले से ही एक अन्य व्यक्ति के साथ संबंध में थी। पति ने कहा कि 11 जनवरी 2023 को उसने पत्नी को उसी व्यक्ति के घर पर पाया और उसके पिता व भाई को मौके पर बुलाया था। पत्नी कथित रूप से आपत्तिजनक स्थिति में मिली, जिसके बाद उसे मायके भेज दिया गया।

पत्नी ने सभी आरोपों से इनकार किया और पति व ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न के आरोप लगाए। साथ ही यह भी कहा कि ससुर की उस पर गलत नजर थी। फैमिली कोर्ट ने कहा था कि यदि ससुर की नीयत खराब थी तो पत्नी उसके साथ लगातार आना-जाना क्यों करती। पत्नी के आरोपों को लापरवाह, गैर-जिम्मेदाराना और झूठा बताते हुए इस तरह चरित्र पर बेबुनियाद आरोप को पति के प्रति क्रूरता माना।

अदालत ने कहा कि बिना किसी ठोस साक्ष्य के पति और उसके परिवार पर लगातार गंभीर आरोप लगाना मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है। कोर्ट ने माना कि विवाह विच्छेद का आधार व्यभिचार नहीं, बल्कि पत्नी द्वारा किया गया क्रूर व्यवहार था। हाईकोर्ट ने कहा कि पारिवारिक अदालत के फैसले में हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।

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Author: Farheen

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