सूबे ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के छोटे नोटों को चलन में लाने का लक्ष्य भी पूरा कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार अगर मार्च 2025 से तुलना की जाए तो पंजाब में मार्च 2026 के दौरान 100 के नोटों में चलन में 5.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है।

पंजाब में डिजिटल पेमेंट की बढ़ोतरी के बीच छोटे नोटों का चलन बढ़ा है। प्रदेश में 50 और 100 के नोटों के चलन में वृद्धि देखने को मिली है। इसमें सूबा देश भर में दूसरे नंबर पर है जबकि 500 के नोटों के चलन में प्रदेश में कमी आई है। यह बात स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की रिपोर्ट में सामने आई है।
सूबे ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के छोटे नोटों को चलन में लाने का लक्ष्य भी पूरा कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार अगर मार्च 2025 से तुलना की जाए तो पंजाब में मार्च 2026 के दौरान 100 के नोटों में चलन में 5.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है। पहले नंबर पर तेलंगाना है। वहां यह बढ़ोतरी सबसे अधिक 7.9% रही है।
इसी तरह सूबे में 50 के नोटों के चलन में भी 0.3% की वृद्धि हुई है। 200 के नोटों के चलन में 4.5% और 500 के नोटों में 1.8% की कमी आई है। आरबीआई ने सभी बैंकों को हाल ही में निर्देश दिए थे कि छोटे नोटों जैसे 50, 100 के नोटों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि छोटे नोटों की किल्लत न हो।
अप्रैल 2025 में जारी इन निर्देशों का उद्देश्य दैनिक लेनदेन को आसान बनाना था। पंजाब के संदर्भ में यह स्थिति महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि, मंडी व्यवस्था, छोटे व्यापार और ग्रामीण बाजारों की बड़ी भूमिका है और इसमें लेनदेन के लिए नकदी का विशेष महत्व रहता है। यह वृद्धि संकेत दे रही है कि सूबे में दैनिक खरीदारी, कृषि मजदूरी, परिवहन और स्थानीय व्यापार में छोटे मूल्य के नोटों का अधिक प्रयोग किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश में 500 के नोटों में 8.5% की वृद्धि
इस सब के बावजूद कई राज्यों में बड़े नोटों का चलन भी बढ़ा है। मध्य प्रदेश में 500 के नोटों में 8.5% की वृद्धि दर्ज की गई है। दूसरे नंबर पर 5.8% की बढ़ोतरी दिल्ली में रही है जबकि तीसरे नंबर पर असम में 3.8% की वृद्धि दर्ज की गई है। अगर पूरे देश भर की बात करें तो वित्त वर्ष 2026 में प्रचलन में मुद्रा बढ़कर 41.6 लाख करोड़ तक पहुंच गई है जिसमें 11.9% की वृद्धि दर्ज की गई। इसी तरह
वहीं यूपीआई लेन-देन का मूल्य बढ़कर 314 लाख करोड़ हो गया। इसमें 20.6% की बढ़ोतरी हुई है।
नकदी रखने की परंपरा अब भी मजबूत
चंडीगढ़ में डीएवी कॉलेज अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर बिमल अंजुम ने बताया कि आपातकालीन परिस्थितियों के लिए लोग अपने पास नकदी रखते हैं। पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य में यह प्रवृत्ति अधिक दिखाई देती है क्योंकि किसानों और छोटे व्यापारियों में नकदी रखने की परंपरा अभी भी मजबूत है। हालांकि शहरी क्षेत्रों जैसे लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और मोहाली में यूपीआई का उपयोग तेजी से बढ़ा है फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी का महत्व बना हुआ है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था यह दर्शाती है कि डिजिटल भुगतान और नकदी दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।