
सीबीआई ने यह मामला 19 मई 2016 को दर्ज किया था। चार्जशीट के मुताबिक भूपेंद्र सिंह हुड्डा जब मुख्यमंत्री रहते हुए एचएसवीपी के अध्यक्ष थे तो उन्होंने पंचकूला में 14 औद्योगिक भूखंडों के लिए आवेदन मांगे थे। अपने चहेतों को प्लॉट देने के लिए हुड्डा ने आवेदन की तिथि बीत जाने के बाद नियमों में बदलाव कर दिया। इसमें अनुभव व योग्यता कम कर दी गई और मौखिक परीक्षा के अंक बढ़ा दिए गए। वित्तीय क्षमता के अंक 25 से घटाकर 10 कर दिए गए जबकि वाइवा-वॉइस के अंक 15 से बढ़ाकर 25 कर दिए गए। 14 भूखंडों के लिए 582 आवेदन आए थे।
जांच के अनुसार 30.34 करोड़ रुपये के भूखंड 7.85 करोड़ रुपये में आवंटित किए गए। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। सीबीआई ने कोर्ट में यह भी बताया कि डीपीएस नांगल के खिलाफ धारा 197 के तहत तो स्वीकृति मिल चुकी है मगर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत मंजूरी का इंतजार है। मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से एक गवाह नरेंद्र कुमार सोलंकी की धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज बयान भी सीलबंद लिहाफे में अदालत में पेश किया गया जिसे सुरक्षित रखने के आदेश दिए गए हैं।
इन्हें बनाया गया आरोपी
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा : पूर्व मुख्यमंत्री व हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के चेयरमैन
धर्मपाल सिंह नांगल : पूर्व आईएएस व हुडा के पूर्व मुख्य प्रशासक
सुभाष चंद्र कांसल : हुडा के पूर्व मुख्य वित्तीय नियंत्रक
भारत भूषण तनेजा : हुडा के डिप्टी सुपरिटेंडेंट
वाईपीटी इंटरटेनमेंट हाउस प्राइवेट लिमिटेड के मालिक
रेनू हुड्डा : पूर्व सीएम की करीबी व उनके पैतृक गांव की निवासी
अशोक वर्मा : कांग्रेस नेता अशोक काका के दामाद
सिद्धार्थ भारद्वाज : कांग्रेस नेता संजीव भारद्वाज के