आरोपी की ओर से दलील दी गई कि वह 19 जनवरी 2018 से लगातार हिरासत में है और अब तक 309 गवाहों में से केवल 41 की ही गवाही हो सकी है। ऐसे में लंबी कैद के आधार पर जमानत दी जानी चाहिए। वहीं राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल देव सिंह ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरोपी इस जघन्य अपराध का मुख्य साजिशकर्ता है।

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के बहुचर्चित कठुआ सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड के मुख्य आरोपी शुभम संगरा को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह अपराध इतना जघन्य है कि यह समाज की सामूहिक अंतरात्मा और न्यायिक चेतना दोनों को झकझोर देता है।
आरोपी की ओर से दलील दी गई कि वह 19 जनवरी 2018 से लगातार हिरासत में है और अब तक 309 गवाहों में से केवल 41 की ही गवाही हो सकी है। ऐसे में लंबी कैद के आधार पर जमानत दी जानी चाहिए। वहीं राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल देव सिंह ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरोपी इस जघन्य अपराध का मुख्य साजिशकर्ता है। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता को भोजन नहीं दिया गया और उसे बेहोशी की दवाएं दी गईं। उसकी मौत दम घुटने से हुई जिससे हृदय और फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया।
जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल की एकल पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता सामने आती है और उस पर आठ वर्षीय बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म और हत्या में मुख्य भूमिका के गंभीर आरोप हैं। ऐसे में उसे जमानत देना उचित नहीं होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल हिरासत की अवधि के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती खासकर जब अपराध की प्रकृति और संभावित सजा गंभीर हो।
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को मामले की सुनवाई तेज करने के निर्देश देते हुए एक वर्ष में ट्रायल पूरा करने को कहा। अदालत ने कहा कि शीघ्र सुनवाई का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कठुआ से पठानकोट स्थानांतरित किया गया था। 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि आरोपी घटना के समय नाबालिग नहीं था और उस पर वयस्क के रूप में ही मुकदमा चलेगा। फिलहाल मामला पठानकोट की सत्र अदालत में लंबित है।



