
अभी लोकसभा की हैं 10 सीटें
सीटों के मौजूदा बंटवारे को देखें तो हरियाणा के पास लोकसभा की कुल 543 में से 1.89 फीसदी यानी 10 सीटें हैं। अगर 815 सदस्यों वाली लोकसभा में भी यह अनुपात बरकरार रखा जाता है, तो हरियाणा के पास 15 सीटें होंगी, जिनमें से 5 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। वहीं, विधानसभा में अभी 90 सीटें हैं, नए परिसीमन के हिसाब से बढ़कर 119 या 120 सीटें हो जाएंगी। इनमें से 40 सीटें सिर्फ महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यानी लोकसभा हो या विधानसभा में हर तीसरी सीट महिला प्रतिनिधि की होगी। नए परिसीमन व लोकसभा व विधानसभा में 33 फीसदी आरक्षण लागू होने की कार्यवाही को आगे बढ़ाने की बात से पूरे हरियाणा में हलचल तेज हो गई है।
हरियाणा को विधानसभा का नया भवन जरूरी होगा
विधानसभा की सीटें बढ़ने से 2029 से पहले हरियाणा को नए विधानसभा की भी आवश्यकता पड़ेगी। वर्तमान विधानसभा भवन नए परिसीमन के हिसाब से छोटा पड़ेगा। इसमें विधायकों, अधिकारियों और मीडिया के लिए पर्याप्त स्थान और सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे कार्य संचालन में कई बार कठिनाई आती है। पिछले कई वर्षों से हरियाणा सरकार इस दिशा में नए भवन के निर्माण या वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर प्रयासरत रहे हैं।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता के कार्यकाल के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन के साथ नई जमीन के लिए भूमि आदान-प्रदान को लेकर बातचीत लगभग अंतिम चरण तक पहुंच चुकी थी। हालांकि, यह प्रक्रिया पूरी तरह आगे नहीं बढ़ पाई।
फरीदाबाद, गुरुग्राम व सोनीपत में सबसे ज्यादा सीटें बढ़ेगी
नए परिसीमन के हिसाब से गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत व करनाल जिले में विधानसभा की सबसे ज्यादा सीटें बढ़ेंगी। 2011 के जनसंख्या के अनुसार फरीदाबाद जिले की आबादी 18 लाख से ज्यादा है। वहीं, गुरुग्राम की 15 लाख, करनाल की 15 लाख और सोनीपत की साढ़े 14 लाख आबादी है। ये सारे शहर शहरी इलाके हैं। ऐसे में अब हरियाणा में शहरी विधानसभा क्षेत्र ज्यादा होंगे।
यानी हरियाणा में राजनीति जो अभी ग्रामीण क्षेत्रों पर केंद्रित है, अब वह शहरी केंद्रित हो सकती है। इससे खासकर क्षेत्रीय दलों के सामने नया संकट आ सकता है। क्षेत्रीय दलों की राजनीति मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों पर ही केंद्रित रहती है।