मथुरा नाव हादसा: जगरांव में पसरा मातम, शहर पहुंचे मृतकों के शव; अंतिम संस्कार में शामिल होंगे सीएम मान

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मथुरा के वृंदावन में केसीघाट और बंशीवट के बीच शुक्रवार को पांटून पुल से टकराकर श्रद्धालुओं से भरी एक मोटरबोट पलट गई थी। इस हादसे में छह महिलाओं समेत 10 लोगों की मौत हो गई थी।

Mathura Boat Tragedy Grief Grips Jagraon Bodies of Deceased Funeral Rites

मथुरा में नाव हादसे में मारे गए पांच लोगों के शव जगरांव लाए गए हैं। हादसे में जगरांव के ईशान कटारिया, कपूर काॅलोनी कच्चा मलक रोड, मधुर बहल व मां कविता रानी, गीता काॅलोनी, चरनजीत सिंह काला और उनकी पत्नी शामिल हैं। मृतकों के घरों में मातम पसरा हुआ है।

इस दौरान ज्यादातर श्रद्धालु धर्मशाला में ही आराम करने अपने-अपने कमरों में रुक गए जबकि वहां से 30 के करीब श्रद्धालु बांके बिहारी मंदिर में माथा टेकने के बाद यमुना नदी में चले गए। इस दौरान उनकी स्टीमर नाव दरिया के अंदर ही बना रहे टेंपरेरी पीपा पुल से टकराने के बाद वहीं यमुना में ही डूब गई।

उधर, लुधियाना के डीसी हिमांशु जैन का कहना है कि मथुरा में हुए नाव हादसे में ज्यादातर लोग जगरांव के हैं। इस संबंध में प्रशासन पीड़ितों के परिजनों की सहायता के लिए कंट्रोल रूम स्थापित कर रहा है। इसके अलावा प्रशासन मथुरा के जिला प्रशासन के साथ संपर्क से हैं। वहां के डीएम से भी बात की गई है। साथ ही प्रशासन पीड़ित परिवारों से संपर्क साधने का प्रयास कर रहे हैं। जिंदा बाहर निकाले गए श्रद्धालुओं में जगरांव के रहने वाले सुनील कुमार की पत्नी, यशु पुत्र रमेश बजाज और लवेश के नाम सामने आए हैं, जिनकी फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं है परंतु उन्हें वहां के रामकृष्ण मिशन अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

इसके अलावा मोगा और लुधियाना के दुगरी का एक श्रद्धालु भी अस्पताल में ही है। जानकारी के मुताबिक 9 अप्रैल को जगरांव के श्री बांके बिहारी क्लब की तरफ से दो बसों में पर्यटकों को ले जाया गया था। वृंदावन की 4 दिन की यात्रा थी, जिनका 4500 रुपया किराया लिया गया था। बस में जगरांव के ज्यादातर श्रद्धालु थे इसके अलावा लुधियाना मोगा और मुक्तसर के कुछ लोग भी बसों में सवार थे। इस हादसे की सूचना मिलते ही जगरांव में मातम छा गया। पीड़ित परिवारों के परिजन यह खबर सुनते ही मथुरा के लिए रवाना हो गए।

श्रद्धालुओं में शामिल मल्होत्रा मोबाइल के शोरूम में काम करते श्वेत जैन ने मथुरा से बताया कि यमुना में पीपों का पुल बनाया गया था। जलस्तर बढ़ने के बाद इन्हें खोल दिया गया। इसके बाद यह पुल यमुना में बहने लगे। इनसे टकराकर ही स्टीमर पलटा। श्वेत जैन के मुताबिक हादसा दोपहर करीब 3 बजे केसी घाट पर हुआ जो श्री बांके बिहार मंदिर से ढाई किमी की दूरी पर है।

उन्होंने बताया कि जब किश्ती डूबी तो आसपास के किश्ती वालों ने कईयों को बचा कर अपनी किश्ती में बिठा लिया। 6 से 7 लोगों के शव तो वह यहां पर अस्पताल में देख चुके हैं। उन्होंने बताया कि जगरांव के ज्यादातर श्रद्धालु वृंदावन में फोगला आश्रम के पास रुके हैं।

श्वेत ने बताया कि नाविक को कहा कि रोक लो। श्वेत जैन के मुताबिक हमारा स्टीमर जब पीपा पुल के पास पहुंचा तो हम लोगों ने नाविक से कहा कि पुल आने वाला है, रोक लीजिए लेकिन उसने नहीं रोका। 2 बार स्टीमर टकराने से बचा। तीसरी बार में टक्कर हो गई। पास में कुछ गोताखोर थे जिन्होंने हमें बचाया है।

श्रद्धालुओं के साथ ही वृंदावन गई जगरांव के सीनियर एडवोकेट संदीप गुप्ता की पत्नी सीमा गुप्ता ने बताया कि बताया कि आश्रम में से 120 लोगों में से 25 से 30 लोग ही यमुना देखने और मंदिर में माथा टेकने गए थे जिन में ज्यादातर नौजवान श्रद्धालु ही शामिल थे। उन्होंने कहा कि दोपहर 3:00 बजे हुए हादसे के बाद जैसे ही आश्रम में बैठकर बाकी श्रद्धालुओं को इस बाबत जानकारी मिली तो सभी का रो-रो कर बुरा हाल हो गया।
अंतिम संस्कार तक जगरांव बंद 

वृंदावन में हुए नाव हादसे में मारे गए श्रद्धालुओं की आत्मिक शांति एवं श्रद्धांजलि देने के लिए शनि मंदिर में शहरवासी एवं विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक एवं धार्मिक संगठनों से जुड़े लोग जमा हुए।

इस अवसर पर जगरांव से विधायक सर्बजीत कौर माणुके एवं पूर्व विधायक एसआर कलेर व अन्य लोगों ने इस अनहोनी घटना में प्रभु चरणों में विलीन हुए तीर्थ यात्रियों की आत्मा की शांति के लिए उनके अंतिम संस्कार तक जगरांव बंद रखने की सार्वजनिक तौर पर अपील की और लोगों से इस दुख की घड़ी में सहयोग मांगा।

वीडियो भेजकर कहा था सब ठीक है, कुछ देर बाद आई हादसे की खबर

आत्मनगर के दुगरी इलाके में शुक्रवार रात उस वक्त गहरा शोक छा गया, जब वृंदावन में हुए एक दर्दनाक नाव हादसे की खबर यहां पहुंची।

हादसे में इस इलाके के अंजू और रिकेश गुलाटी सहित मीनू की मौत हो गई जबकि राजिंदर कौर गंभीर हालत में जिंदगी की जंग लड़ रही हैं। इसके अलावा, इलाके के कुछ लोग अभी तक लापता हैं और उनके परिवारों का तनाव और बढ़ गया है। इस घटना के बाद, विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू ने दुगरी पहुंचकर शोक संतप्त परिवारों के साथ संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में सरकार और प्रशासन हर तरह से पीड़ितों के साथ खड़े हैं और सभी आवश्यक मदद दी जाएगी।

घटना की खबर सुनते ही गुलाटी परिवार के बेटे और बेटी, जो क्रमशः पूना और बंगलूरू में रहते हैं, लुधियाना के लिए रवाना हो गए। वहीं मीनू के परिजन भी वृंदावन के लिए निकल पड़े। मोहल्ले में चर्चाओं का दौर जारी है, जहां लोग इस हादसे की सच्चाई जानने के लिए बेताब हैं। दुर्घटना के बाद से कई मोबाइल फोन स्विच ऑफ हैं और परिजनों से संपर्क नहीं हो पा रहा। एक रिश्तेदार ने बताया कि हम नहीं जान पा रहे कि हमारे अपने जीवित हैं या नहीं, बस इंतजार कर रहे हैं।

मोहल्ले के लोगों के अनुसार इस इलाके से करीब दस लोग एक साथ वृंदावन गए थे। शुक्रवार को दिन में करीब एक बजे तक सभी ने वीडियो भेजकर अपने सुरक्षित होने की जानकारी दी थी लेकिन इसके कुछ ही समय बाद फोन आया कि नाव हादसा हो गया है। इसके बाद से पूरे इलाके में चीख-पुकार और सन्नाटा पसरा हुआ है।

दुगरी में लोगों का जमावड़ा लगा है लेकिन कोई भी बोलने की स्थिति में नहीं है। हर आंख नम है और हर कोई अपनों की सलामती की दुआ कर रहा है। अंजू और रिकेश गुलाटी को पड़ोसी बेहद मिलनसार बताते हैं। उनके अचानक चले जाने से पूरे मोहल्ले में गहरा शोक है।

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Author: Farheen

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