अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) बताएगा कि कब जन्म होगा? भारत ने देसी मॉडल बनाया है। गर्भावस्था की सही उम्र तय करने में मदद मिलेगी। समय से पहले जन्म के खतरे की भी पहचान होगी। 12 हजार से ज्यादा गर्भवती महिलाओं के डेटा पर आधारित देश का सबसे बड़ा अध्ययन किया गया है।

गर्भ में पल रहे शिशु का जन्म कब होगा, इसका अंदाजा अब सिर्फ अनुमान या विदेशी फॉर्मूलों पर निर्भर नहीं रहेगा। भारत ने पहली बार अपने डाटा पर आधारित ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल तैयार किया है, जो गर्भावस्था की सही उम्र का ज्यादा सटीक आकलन कर सकता है और समय से पहले जन्म (प्री-टर्म) के खतरे की पहचान भी कर सकता है।
अब तक देश में गर्भावस्था की अवधि तय करने के लिए मुख्य रूप से विदेशी मॉडल जैसे हेडलॉक और इंटरग्रोथ का इस्तेमाल होता रहा है, जो पश्चिमी आबादी के डाटा पर आधारित हैं। लेकिन भारतीय महिलाओं की शारीरिक, पोषण और सामाजिक परिस्थितियां अलग होने के कारण इन मॉडलों की सटीकता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह मॉडल खास तौर पर उन महिलाओं के लिए उपयोगी होगा, जो गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में डॉक्टर के पास नहीं पहुंच पातीं या जिन्हें अपनी आखिरी माहवारी (एलएमपी) की सही जानकारी नहीं होती।
अलीगढ़ स्थित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (जेएनएमसी) के अध्ययन के मुताबिक, पश्चिमी यूपी सहित देश में नवजात मौतों का सबसे बड़ा कारण अब समय से पहले जन्म (प्री-टर्म बर्थ) बन चुका है। भारत में हर चार में से एक नवजात की मौत प्री-टर्म जन्म से जुड़ी जटिलताओं के कारण होती है।