ईंटों के दाम बढ़ने का असर निर्माण कार्यों पर भी पड़ा है। ईंटों की सेल में भारी गिरावट दर्ज की गई है। बिल्डरों से लेकर आम आदमी तक महंगी ईंटें खरीदने से कतरा रहे हैं।

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब पंजाब के उद्योगों पर साफ देखने को मिल रहा है। युद्ध के नाम पर कोयला व्यापारियों ने कीमतों में भारी उछाल कर दिया है, जिसका सीधा नुकसान ईंट भट्ठा उद्योग को हुआ है।
बढ़ती लागत के चलते प्रदेश में करीब 100 ईंट भट्ठे बंद हो गए हैं। ईंटों की कीमतों में भी एक हजार रुपये प्रति हजार का इजाफा हो गया है।
कोयला व्यापारियों ने प्रति टन कोयले के दाम में 10 हजार रुपये की बढ़ोतरी की है। यह कोयला यूएसए से मंगवाया जा रहा है, जिसके चलते ईंट उत्पादन की लागत आसमान छू रही है। पहले जहां सात हजार रुपये में एक हजार ईंटें मिल जाया करती थीं वहीं अब उपभोक्ताओं को आठ हजार रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
ईंट भट्ठा मालिक एसोसिएशन के प्रधान राकेश अग्रवाल बबली ने बताया कि कोयले पर 18 फीसदी जीएसटी, ईंटों पर 12 फीसदी जीएसटी और ढाई लाख रुपये के करीब माइनिंग फीस ने उद्योग को बर्बाद कर दिया है। पहले से ही महंगाई से जूझ रहे इस उद्योग पर कोयले की कीमतों ने आखिरी वार कर दिया। पंजाब में करीब 1800 ईंट भट्ठे हैं, जिनमें से 100 बंद हो चुके हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भारत का अपना कोयला भी अमेरिका से आने वाले कोयले से ज्यादा महंगा पड़ रहा है। कई कोयला खदानें बंद होने से देश कोयले के मामले में आयात पर निर्भर हो गया है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में और भी भट्ठे बंद हो सकते हैं।
निर्माण कार्यों पर संकट
ईंटों के दाम बढ़ने का असर निर्माण कार्यों पर भी पड़ा है। ईंटों की सेल में भारी गिरावट दर्ज की गई है। बिल्डरों से लेकर आम आदमी तक महंगी ईंटें खरीदने से कतरा रहे हैं। एसोसिएशन के सचिव संजीव गुप्ता, जीरा के प्रधान बलटेक सिंह और गुरुहरसहाए के लाडा वोहरा ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार अगर जल्द कदम नहीं उठाती, तो पूरा उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच जाएगा।