Dhurandhar 2 Review: क्या पहले पार्ट जितनी ही यादगार है ‘धुरंधर 2’? या रह गई कोई कमी? पढ़ें मूवी रिव्यू

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रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ रिलीज हो चुकी है। पहले पार्ट की सफलता के बाद इस फिल्म को लेकर हाइप तो जबरदस्त है पर क्या वाकई ‘धुरंधर 2’ पहले पार्ट जितनी ही दमदार है? या कहीं कोई कमी रह गई? जानिए इस स्पॉइलर फ्री रिव्यू में…

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फिल्म ‘धुरंधर 2′ को लेकर शुरुआत से ही जबरदस्त हाइप बना हुआ था। मेकर्स यह बात अच्छे से जानते थे कि दर्शक इस फिल्म के दूसरे पार्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उन्हें इस बात का यकीन भी था कि इसके दूसरे पार्ट को भी पहले जितना ही प्यार मिलेगा। ठीक वैसे ही जैसे दर्शकों को यकीन था कि उन्हें दूसरे पार्ट में पहले से भी ज्याद दमदार कहानी देखने को मिलेगी।

अब दर्शकों ने तो अपनी वफादारी दिखाते हुए ‘धुरंधर द रिवेंज’ की जमकर एडवांस बुकिंग कर डाली पर मेकर्स इसके लिए तैयारी नहीं कर पाए। नतीजतन, देशभर के कई शहरों में जब प्रीव्यू शोज कैंसल हुए तो दर्शक बेहद निराश हुए। खैर जिन्हें मौका मिला उन्होंने फिल्म देखी। अब सवाल यह है कि क्या जिन्होंने फिल्म देखी वो भी निराश हुए?

कैसी है फिल्म?
‘धुरंधर 2’ को देखते वक्त आप निराश नहीं होंगे पर लगभग चार घंटे की इस फिल्म में बीच-बीच में बोर जरूर होंगे। हमजा अली मजारी हो या जसकीरत सिंह रांगी, दोनों को देखकर आपको मजा तो आएगा पर आप कहीं न कही रहमान डकैत के ऑरा को मिस जरूर करेंगे।
संजय दत्त हो या अर्जुन रामपाल, अगर आप यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि ये किरदार कुछ बड़ा धमाका करेंगे तो आप निराश होंगे। सारा अर्जुन तो आधी फिल्म निकल जाने के बाद पलभर के लिए नजर आएंगी। तो कुल मिलाकर पूरे चार घंटे आप रणवीर सिंह को ही स्क्रीन पर देखते हैं।
हां, माधवन और राकेश बेदी जरूर बीच-बीच में जान फूंकते नजर आएंगे। फिल्म की शुरुआत और क्लाइमैक्स दोनों दमदार हैं पर एक बड़ी कमी है, जो पूरी फिल्म पर हावी है। क्या है वो? जानिए…

कहानी
फिल्म की कहानी छह चैप्टर में बांटी गई है। शुरुआत फ्लैशबैक से होती है, जहां जसकीरत सिंह रांगी (रणवीर सिंह) और उसके परिवार को दिखाया है। जसकीरत के पिता भी फौजी थे और वो खुद भी फौज में भर्ती होने की तैयारी कर रहा था पर तभी कुछ ऐसा होता है कि उसे अपने परिवार की रक्षा के लिए बंदूक उठानी पड़ती है।
जसकीरत अपने परिवार के साथ हुए अन्याय का बदला लेने के लिए एक एमएलए के घर में घुसकर खून-खराबा करता है। मामले में उसे उम्र कैद की सजा सुनाई जाती है। आगे जाकर आईबी डायरेक्टर अजय सान्याल (आर माधवन) उसे देश के लिए कुछ करने का मौका देते हैं।
इसके बाद जसकीरत पाकिस्तान में इंडिया का एजेंट बनकर एंट्री लेता है जहां उसका नाम होता है हमजा अली मजारी। इसके आगे की कहानी फिल्म के पहले पार्ट में दिखाई गई थी और अब कहानी सीधा पहुंचती है रहमान डकैत (अक्षय खन्ना) की मौत से आगे।
रहमान की मौत के बाद हमजा उसके छोटे भाई उजैर (दानिश पंडोर) को ल्यारी की गद्दी पर बैठाकर, अपने मकसद में आगे बढ़ता है। आगे जाकर मेजर इकबाल (अर्जुन रामपाल) हमजा की मुलाकात अपने बड़े साहब से करवाते हैं। अब कौन हैं ये बड़े साहब? क्या हमजा का असली मकसद इन्हीं बड़े साहब को मारना है? क्या वो इस मकसद में कामयाब हो पाएगा? जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

अभिनय
पूरी फिल्म में रणवीर सिंह स्क्रीन पर छाए हुए हैं। मैंने पहले भी कहा है और फिर से कहूंगा कि रणवीर भले ही ऑफस्क्रीन कैसी भी हरकतें करते हों पर कैमरा ऑन होती है वो इतना सीरियस हो जाते हैं कि हर किरदार में परफेक्ट लगते हैं। उनका कोई सीन कमजोर नहीं है। गुस्सा, एक्शन सीन, इमोशंस सब कुछ परफेक्ट है।
अर्जुन रामपाल को इस पार्ट में ज्यादा स्क्रीन स्पेस मिला है पर उनका किरदार वैसा भयानक नहीं गढ़ा गया जैसा पहले पार्ट में दिखाया गया था। एक-दो सीन छोड़कर उनके पास यहां एक्टिंग करने के लिए कुछ था नहीं।
संजय दत्त उनते ही दिखे हैं जितना पहले पार्ट में थे। माधवन जब जब स्क्रीन पर आते हैं बिगड़ती हुई फिल्म को संभाल जाती है। सारा अर्जुन का फिल्म में सिर्फ एक ही बड़ा सीन है। बाकी फिल्म से पूरी तरह गायब ही हैं।
राकेश बेदी पहले पार्ट की तरह इस पार्ट में भी सरप्राइज पैकेज ही हैं। यकीन मानिए फिल्म के क्लाइमैक्स में आप उनके फैन बन जाएंगे। बाकी मानव गोहिल, गौरव गेरा, दानिश पंडोर और राज जुत्सी ने अपने किरदार के साथ न्याय किया है।

निर्देशन 
इस पूरी फिल्म के लिए आदित्य धर ने जो कमाल की रिसर्च और डिटेल्ड वर्क किया है वो काबिल-ए-तारीफ है। यही ‘धुरंधर’ के हिट होने की एक बड़ी वजह भी थी। पार्ट 2 में उन्होंने नोटबंदी, अतीक अहमद और दाऊद इब्राहिम का जो कनेक्शन जोड़ा है वह देखकर मजा भी आता है।
हालांकि, जिस तरह से उन्होंने पहले पार्ट में स्टोरी टाइट रखी थी और समय-समय पर सरप्राइज दिया था, इस पार्ट में वैसा नहीं है। ऐसा लगता है जैसे आदित्य ने इस दूसरे पार्ट पर ज्यादा काम नहीं किया। उन्होंने यह सोचकर इसे रिलीज कर दिया कि यह तो पहले पार्ट की हवा में ही चल जाएगी।
शुरुआत और क्लाइमैक्स छोड़ दें तो पूरी फिल्म में इक्का-दुक्का ही यादगार सीन होंगे। एक्शन सीन अच्छे हैं पर कुछ जबरन लंबे भी हैं।  बाकी पूरी फिल्म तो इस तरह चलती है कि जैसे कोई कहानी शुरू की थी और अब बस उसे पूरा करना है।
कई सीन और उनके आगे की कहानी का अंदाजा पहले ही लग जाता है। आदित्य यहां कुछ सरप्राइज एलीमेंट रखते तो मजा दोगुना हो जाता। हां, क्लाइमैक्स में जरूर उन्होंने थोड़ी जान फूंकी है पर तब तक काफी देर हो गई।

संगीत
पिछले पार्ट के मुकाबले कमजोर है। एक-दो गाने छोड़कर कोई गाना यादगार नहीं है। एक रोमांटिक सॉन्ग है जो जबरन ठूंसा लगता है।

देखें या नहीं
पहला पार्ट देखा था तो जरूर देखिए। हाइप और सेलेब्स के रिव्यू देखकर न जाएं। ठीक-ठाक फिल्म है एंजॉय करके वापस लौट आएं। फिल्म से बहुत ज्यादा या पहले पार्ट जैसी सीन, सरप्राइज या एंटरटेनमेंट की उम्मीदें ना रखें।

 

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Author: ILMA NEWSINDIA

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