सर्वे के बाद जब सरहाली इलाके में रजबहा बनाने का काम शुरू किया गया तो खोदाई के दौरान मिट्टी के नीचे एक निर्माण के रूप में ईंटें निकलने लगी। खुदाई जब जारी रखी गई तो 22 किलोमीटर तक ईंटों से बना एक तैयार रजबहा ढूंढ निकाला गया।

इसे लापरवाही का बड़ा उदाहरण कहेंगे कि तरनतारन में 22 किलोमीटर लंबा सरहाली रहबहा (डिस्ट्रीब्यूटरी) कई वर्षों तक गाद के नीचे दबता चला गया और महकमे ने इस ओर कोई ध्यान ही नहीं दिया। इस रजबहा को तरनतारन के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में सिंचाई के लिए नहरी पानी पहुंचाने के मकसद से बनाया गया था। रजबहा पूरी तरह मिट्टी के नीचे दब गया और झाड़ियों में छिप गया। वर्षों तक लोग यहां नहरी पानी से सिंचाई सुविधा के लिए तरसते रहे।
इलाके के लोग सरकार से मांग करने लगे कि जिस तरह अन्य जिलों के खेतों में सिंचाई के लिए नहरी पानी पहुंचाया जा रहा है। उसी तरह तरनतारन में भी एक रजबहा बनाकर विभिन्न माइनरों के जरिये उनके खेतों तक भी नहरी पानी पहुंचाया जाए। बीते नवंबर में तरनतारन उपचुनाव के दौरान भी यह मुद्दा उठा था। यह मांग जब मुख्यमंत्री भगवंत मान तक पहुंची तो उन्होंने जल स्रोत महकमे के प्रशासकीय सचिव कृष्ण कुमार को इसकी जिम्मेदारी सौंपी।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान कहते हैं कि यह हैरान करने वाली बात है कि पिछली सरकारों में इस ओर कोई ध्यान ही नहीं दिया गया। 22 किलोमीटर लंबी डिस्ट्रीब्यूटरी मिट्टी के नीचे गुम हो जाती है और अफसरों व कर्मचारियों को भनक तक नहीं लगती। सीएम के अनुसार इसे ढूंढने वाले अफसर व कर्मचारी वाकई बधाई के पात्र हैं।
जल स्रोत महकमे द्वारा ढूंढ निकाले गए इस रजबहा से कंग माइनर, जोरा डिस्टी, माछीके, खाबा, पट्टी डिस्टी, दुधेर माइनर, मनो चहल माइनर, चक मेहर माइनर, माल मोहरी व माल मोहरी माइनर को लिंक कर दिया गया है। इन माइनरों के माध्यम से अब विभिन्न गांवों तक पानी पहुंचना शुरू हो गया है।
4737 एकड़ खेतों तक पहुंचा पानी
गुम हो चुके रजबाहे को ढूंढने के बाद अभी तक 4737 एकड़ कृषि योग्य भूमि को सिंचाई के लिए नहरी पानी पहुंचने लगा है। रजबाहे से लिंक के बाद विभिन्न माइनरों के जरिये कंग, नौरंगाबाद, कैरों, बहनिवाल, जमालपुर समेत मियांवाल, असल उत्तर, भुरकोना, सरहाली, नौशहरा पन्नुआ, नंदपुर, खब्बे राजपूतान, कीरतोवाल, तुंग, प्रिंगरी, सभरांव, दुधेर, धत्तल, रानियां, मैनी, सहबजापुर, दिलावलपुर, मालमोहरी, लोहार, गज्जल, संगतपुरा, जोहल ढायेवाला, डुमनीवाला, वान, जामराई, ठठियां महंता गांवों के किसान को भी सिंचाई के लिए नहरी पानी मिल रहा है।