हथियार और ड्रग्स तस्करी का भंडाफोड़, छह आरोपी गिरफ्तार, अत्याधुनिक पिस्तौल, 60 जिंदा कारतूस मिले

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कमिश्नरेट पुलिस अमृतसर ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सीमा पार से हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

Six Accused Linked to Arms and Drug Trafficking Arrested in Amritsar

अमृतसर पुलिस ने सीमा पार से जुड़े हथियार और नशा तस्करी के मामले में कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 6 अत्याधुनिक पिस्तौल, 60 जिंदा कारतूस और 3.513 किलोग्राम हेरोइन बरामद की है। बरामद हथियारों में तुर्की सीरीज की पीएक्स 5.7×28 मिमी टीआईएसएएस पिस्तौल भी शामिल है।

पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी पाकिस्तान आधारित तस्करों के संपर्क में थे, जो भारत-पाक सीमा के नजदीक हथियार और नशीले पदार्थों की सप्लाई में शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार आरोपी एक विदेशी हैंडलर के निर्देश पर काम कर रहे थे, जिससे संगठित तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।

इस संबंध में थाना गेट हकीमां, थाना छेहर्टा और थाना वेरका में मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान के लिए आगे जांच की जा रही है। इस मामले में जल्द ही कई और आरोपियों के गिरफ्तार होने की संभावना है।

पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नशे, अवैध हथियारों की तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ उसकी जीरो टॉलरेंस नीति जारी रहेगी और ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती रहेगी।

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Author: Farheen

सबसे ज्यादा पड़ गई

हालांकि निजी अस्पतालों की बात करें तो वहां इलाज का औसत खर्च 42,359 रुपये है, जो देश के औसत 50,508 रुपये से कम है। इसके बावजूद यह खर्च आम परिवार के लिए भारी ही साबित होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दवाइयों, जांचों और अन्य सहायक सेवाओं पर होने वाला अतिरिक्त खर्च मरीजों की जेब पर दबाव बढ़ा रहा है। सरकारी अस्पतालों में भी पूरी तरह मुफ्त या सस्ती सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण लोगों को बाहर से सेवाएं लेनी पड़ती हैं, जिससे कुल खर्च बढ़ जाता है। ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि हरियाणा में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को और किफायती बनाने की जरूरत है ताकि लोगों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम हो सके। साथ ही, जेब से होने वाले खर्च (आउट-ऑफ-पॉकेट एक्सपेंडिचर) को घटाने के लिए प्रभावी नीतियों की भी आवश्यकता है। चेरिटेबल अस्पतालों की स्थिति बेहतर चेरिटेबल अस्पतालों में दूसरे राज्यों व राष्ट्रीय औसत के मुकाबले खर्च आधे से भी कम है। हरियाणा में प्रति इलाज चेरिटेबल अस्पताल में औसत मेडिकल खर्च 16945 रुपये है जबकि अखिल भारतीय औसत 39,530 रुपये है। एक बार भर्ती होने पर खर्च हो जाते हैं 33,713 रुपये शहरी व ग्रामीण के सरकारी व प्राइवेट अस्पताल में ओवरआल औसतन खर्च हरियाणा में सस्ता है। आंकड़ों से पता चला कि हरियाणा में अस्पताल में भर्ती होने के हर मामले पर औसत मेडिकल खर्च 33,713 आता है, जो भारतीय औसत 34,064 रुपये से थोड़ा कम है। पंजाब में औसतन खर्च 35,703 रुपये है। जिन बीमारियों में भर्ती की जरूरत नहीं होती, उसमें भी ज्यादा खर्च कुछ ऐसी बीमारियां होती हैं जिसमें भर्ती होने की जरूरत नहीं होती, उसमें भी हरियाणा में इलाज कराना काफी महंगा है। हरियाणा में प्रति इलाज गांव में औसतन 1361 रुपये और शहर में 1464 रुपये का खर्च आता है जबकि राष्ट्रीय औसत गांव में 847 रुपये है और शहर में 884 रुपये है। यानी हरियाणा में इलाज का औसत खर्च राष्ट्रीय औसत से करीब 547 रुपये (63%) अधिक है। पड़ोसी राज्य पंजाब के गांव में औसतन खर्च 1283 रुपये और शहर में 1158 रुपये है। खाने का खर्च जोड़ने से खर्चा और बढ़ता है इलाज का खर्च सिर्फ दवा और अस्पताल तक सीमित नहीं रहता बल्कि आने-जाने और खाने का खर्च जोड़ने पर यह और बढ़ जाता है। हरियाणा में एक बार इलाज पर औसतन करीब 45,183 रुपये खर्च आता है। पूरे देश में यही औसत 41,463 रुपये है। यानी हरियाणा में लोगों को राष्ट्रीय औसत के मुकाबले करीब 3,720 रुपये (9%) ज्यादा खर्च करने पड़ते हैं। दूसरी ओर, पंजाब में भी अस्पताल में भर्ती होने पर कुल औसत खर्च 42,319 रुपये है। कारण : दवाओं व सर्जिकल आइटम की कमी से बढ़ता है खर्च पीजीआई रोहतक के पूर्व सर्जन डा. रणबीर दहिया कहते हैं कि सरकारी अस्पतालों में दवाइयां कम मिलती है। डाक्टर की लिखी पांच में से सिर्फ एक या दो दवाइयां ही अस्पताल में मिलती है। बाकी दवाइयां मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। इसी तरह से हड्डियों के ऑपरेशन में लगने वाले इंप्लांट सरकारी अस्पताल में नहीं मिलते हैं। मरीज जब बाहर से खरीदता है तो उसका खर्च तो बढ़ जाता है। कई बार अस्पतालों में इतनी भीड़ होती है या टेस्ट की वेटिंग इतनी लंबी हो जाती है कि मरीज को प्राइवेट में जांच कराना आसान लगता है। इस वजह से खर्च बढ़ता है। इलाज के लिए बार-बार अस्पताल में आने से भी खर्च बढ़ता है। वहीं, आईएमए के पूर्व प्रधान डाॅ. अजय महाजन कहते हैं कि सरकारी अस्पतालों में अक्सर देखा जाता है कि दवाइयां और सर्जिकल सामान बाहर से मंगवाया जाता है, जिसकी वजह से खर्च बढ़ जाता है। मरीज का सबसे ज्यादा खर्च दवाइयों में होता है। किस राज्य में सरकारी अस्पताल में प्रति इलाज कितना खर्च क्रमांक राज्य / केंद्र शासित प्रदेश प्रति इलाज खर्च (₹) 1 छत्तीसगढ़ 3,913 2 दिल्ली 6,394 3 मध्य प्रदेश 4,647 4 राजस्थान 4,177 5 पंजाब 12,200 6 चंडीगढ़ 24,013