
खाड़ी में चल रहे युद्ध ने बहादुरगढ़ के फुटवियर उद्योग को गहरी चोट पहुंचाई है। देश के सबसे बड़े नॉन लेदर फुटवियर उद्योग को अब तक करीब 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। सालाना लगभग 70 हजार करोड़ रुपये का टर्नओवर रखने वाला यह उद्योग फिलहाल गंभीर संकट से जूझ रहा है।
गैस की किल्लत और अनिश्चित माहौल के चलते बड़ी संख्या में मजदूर अपने घरों को लौट गए हैं जो अभी तक नहीं आए हैं। इससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है और फैक्ट्री मालिकों को आधे उत्पादन पर काम चलाना पड़ रहा है। फुटवियर पार्क एसोसिएशन के वरिष्ठ उपप्रधान नरेंद्र छिकारा बताते हैं कि खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के कारण फुटवियर उद्योगों को काफी नुकसान हुआ है।
एक माह से भी ज्यादा समय से उत्पादन आधा रहने से अब तक करीब 10 हजार करोड़ के नुकसान का अनुमान है। अभी स्थिति सामान्य होने में और भी समय लगेगा। यदि अब भी स्थिति में सुधार होता है तो सप्लाई चेन को दोबारा पटरी पर आने में कम से कम एक महीने का समय लग सकता है। वहीं, लेबर की वापसी गर्मी के बाद ही होने की संभावना है। ऐसे में बहादुरगढ़ का प्रमुख उद्योग इस समय अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। इससे हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर भी संकट मंडरा रहा है।
एमआईई पार्ट ए के फुटवियर उद्यमी मुकेश ने बताया कि हम हर रोज एक हजार फुटवियर बनाते थे। अब 500 ही बना रहे हैं। हर रोज 10 हजार रुपये का नुकसान झेल रहे हैं। आधी मशीनें बंद पड़ी हैं। उद्यमी सुभाष जग्गा ने बताया कि फुटवियर का उत्पादन 50 प्रतिशत रह गया है। श्रमिकों की कमी भी 40 प्रतिशत है। काफी परेशानी हो रही है। नुकसान भी हर रोज लाखों में हो रहा है।