Kaithal News: छह माह से नहीं पकड़े गए बेसहारा पशु

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Stray animals have not been caught for six months

कैथल। शहर की सड़कों पर घूमते बेसहारा पशु अब केवल ट्रैफिक जाम का कारण नहीं रहे, बल्कि कई बार लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। नगर परिषद की फाइलों में शहर को पशु मुक्त बनाने के लिए लाखों रुपये के बजट का प्रावधान है और प्रति पशु 1180 रुपये तक की राशि एजेंसी को दी जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। पिछले छह महीनों से शहर में आवारा पशुओं को पकड़ने का अभियान लगभग ठप पड़ा है, जिसके चलते सड़कों पर पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है।

नगर परिषद के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो ऐसा प्रतीत होता है कि शहर को जल्द ही पशु मुक्त कर दिया जाएगा, लेकिन वास्तविकता यह है कि शहर की मुख्य सड़कों से लेकर संकरी गलियों तक करीब 1500 से अधिक बेसहारा पशु खुलेआम घूम रहे हैं। ये पशु कूड़े के ढेरों में मुंह मारते नजर आते हैं और कई बार बीच सड़क पर आपस में भिड़कर राहगीरों के लिए खतरा बन जाते हैं।

 

हाल ही में सुभाष नगर में एक बुजुर्ग व्यक्ति की सांड़ के हमले में मौत हो जाने की घटना ने इस समस्या की गंभीरता को और उजागर कर दिया है। इसके बावजूद पशु पकड़ने का अभियान प्रभावी रूप से शुरू नहीं हो पाया है। रविवार को की गई पड़ताल में सेक्टर-18, माता गेट, डोगरा गेट, करनाल रोड, रेलवे गेट, अंबाला रोड और पुरानी सब्जी मंडी सहित कई स्थानों पर आवारा पशु सड़कों पर घूमते नजर आए। कई जगहों पर ये पशु सड़क के बीचोंबीच बैठे दिखाई दिए।

भुगतान की रार, जनता लाचार : इस समस्या की मुख्य वजह नगर परिषद और पशु पकड़ने वाली एजेंसी के बीच भुगतान को लेकर चल रहा विवाद बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार पुराने बिलों के भुगतान और कुछ शर्तों को लेकर एजेंसी ने काम बंद कर दिया है।

परिषद के अधिकारी इस मामले को लेकर लगातार बैठकों का दौर चला रहे हैं, लेकिन सड़कों पर सांडों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है। हाल ही में हुई बुजुर्ग की मौत ने प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर दिया है।

सुबह और शाम के समय आवारा सांड़ों के आपस में भिड़ने से कई बार वाहन क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और दोपहिया वाहन चालकों को अपनी जान जोखिम में डालकर सड़क पार करनी पड़ती है। कई इलाकों में बुजुर्गों और बच्चों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है।

स्थानीय निवासी रामेश्वर फौजी और कर्मबीर का कहना है कि लोग नियमित रूप से टैक्स भरते हैं ताकि शहर में बुनियादी सुविधाएं मिल सकें, लेकिन यहां तो सड़कों पर आवारा पशु लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं। लोगों का कहना है कि नगर परिषद की ओर से प्रति पशु 1180 रुपये का भुगतान किया जाता है, जो कोई छोटी राशि नहीं है। इसके बावजूद शहर में 1500 से अधिक पशुओं का सड़कों पर घूमना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

समय-समय पर आवारा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजा जाता है। इसके लिए एजेंसी को नियुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अभियान को और तेज किया जाएगा, ताकि सड़कों पर घूम रहे पशुओं को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके। -कपिल शर्मा, जिला नगर आयुक्त

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Author: PRIYA NEWSINDIA