सीएजी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: सार्वजनिक क्षेत्र के सात निगमों ने तीन साल में पहुंचाई 32 करोड़ की चोट

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सीएजी रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश के 27 सार्वजनिक उपक्रमों को 32,393 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ, जिसमें सात निगमों की हिस्सेदारी 99 प्रतिशत रही। सबसे अधिक घाटा ऊर्जा क्षेत्र में दर्ज हुआ। सरकार ने ऊर्जा और नोएडा एयरपोर्ट में भारी इक्विटी निवेश किया, जबकि निर्माण निगम में वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं।

Many PSUs in UP a drain on state exchequer: CAG report | Hindustan Times

सार्वजनिक क्षेत्र के 27 उद्यम राज्य सरकार के लिए बोझ बन गए हैं। इन उपक्रमों का वित्त वर्ष 21-22 और 22-23 (एक को छोड़कर) में नुकसान 32,393 करोड़ रुपये से ज्यादा था। इनमें से अकेले सात निगमों ने 32,202 करोड़ रुपये से ज्यादा की चोट पहुंचाई। यानी कुल नुकसान में इन सात निगमों का योगदान 99 फीसदी से ज्यादा है।

कुल नुकसान में 45 फीसदी योगदान अकेले उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन का है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की मार्च 2023 तक जारी रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है। शुक्रवार को विधान मंडल के दोनों सदनों के पटल पर राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों पर सीएजी रिपोर्ट रखी गई

कुल 113 राज्य सार्वजनिक क्षेत्र में 41 निष्क्रिय

कुल 113 निगमों में से 86 सरकारी कंपनी, 21 सरकार दवारा नियंत्रित और 6 सांविधिक निगम। इन 113 में से 72 क्रियाशील और 41 निष्क्रिय हैं। 13 की तालाबंदी हो चुकी है। 72 क्रियाशील निगमों में से लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड, आगरा-मथुरा सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड, वाराणसी सिटी ट्रांसपोर्ट और उत्तर प्रदेश राज्य कृषि एवं ग्रामीण विकास निगम ने रिपोर्ट ही नहीं दी। 68 क्रियाशील निगम (चार को छोडकर, जिन्होंने अपने वित्तीय विवरण प्रस्तुत नहीं किये थे) का टर्नओवर ( 52,696.60 करोड) था। वर्ष 2022-23 के लिए उतर प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 4.10 प्रतिशत था।

100 करोड़ से ज्यादा फायदे वाले सार्वजनिक निगम

  • पश्चिमांचल विद्युत निगम-991 करोड़
  • उप्र जल विद्युत निगम-275 करोड़
  • उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम-  235 करोड़
  • उप्र राज्य भंडारण निगम-  165 करोड़
  • उप्र आवास एवं विकास परिषद-  144 करोड़
  • उप्र राजकीय निर्माण निगम-   120 करोड़

 

100 करोड़ से ज्यादा नुकसान वाले सार्वजनिक निगम

  • उप्र पावर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन – 556 करोड़
  • पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम – 6610 करोड़
  • मध्यांचल विद्युत वितरण निगम – 4819 करोड़
  • दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम -5073 करोड़
  • उप्र पावर कारपोरेशन लिमिटेड – 14572 करोड़
  • उप्र मेट्रो रेल कारपोरेशन-   319 करोड़
  • उत्तर प्रदेश जल निगम-     250 करोड़
  • कुल-                           32000 करोड़

राजकीय निर्माण निगम ने बिना सूचना जारी कर दिए 1047 करोड़ के वर्कआर्ड

राजकीय निर्माण निगम ने 641.45 करोड़ रुपये के अर्जित ब्याज को कोषागार में जमा नहीं किया। साथ ही संविदाकारों से एडवांस पर ब्याज के रूप में वसूली गई 7.47 करोड़ की धनराशि को भी सरकारी खाते में जमा करने के बजाय अपनी आय का हिस्सा बता दिया। निर्माण निगम के इकाई प्रभारियों ने भी जमकर अनियमितता बरती।

उन्होंने एमडी के आदेश के बिना और बोर्ड को सूचना दिए बगैर 1047 करोड़ के 52 कार्य आदेश (वर्क आर्डर) जारी कर दिए। ये सभी आदेश टेंडर के बजाय सूचीबद्ध ठेकेदारों से कोटेशन लेकर बांट दिए गए। निगम को 137 कार्यों में वित्तीय गड़बड़ियों के कारण 165.72 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा।

ऊर्जा के बाद नोएडा एयरपोर्ट पर सबसे ज्यादा इक्विटी निवेश

सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार ने वर्ष 21-22 और 22-23 में ऊर्जा के बाद सबसे ज्यादा इक्विटी निवेश नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर किया। इन दो वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के 12 निगमों में 24795 करोड़ का निवेश किया गया। इसमें अकेले लगभग 21500 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड, उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड और उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन में किया गया।

दूसरे नंबर पर 1325 करोड़ के साथ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और तीसरे नंबर पर 1257 करोड़ के साथ यूपी मेट्रो रेल कारपोरेशन रहा। इसके अलावा नोएडा मेट्रो रेल कारपोरेशन, राज्य सड़क परिवहन निगम, मेडिकल सप्लाइज कारपोरेशन, बरेली स्मार्ट सिटी, कानपुर स्मार्ट सिटी, मुरादाबाद स्मार्ट सिटी और प्रयागराज स्मार्ट सिटी भी शामिल है।

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