मथुरा में चार हत्या और खुदकुशी का राज लाल पोटलियों में छिपा हो सकता है। किसान मनीष के घर में भी दो पोटलियां मिली हैं। हवेली वाले मंदिर में आस्था रखने वाले पोटली बांधते हैं। मथुरा के खप्परपुर के एक ही परिवार के पांच सदस्यों के शव घर में मिलने से सनसनी फैल गई।

मथुरा के बलदेव के शाहपुर हवेली स्थित हवेली वाले मंदिर की माता के मनीष अनन्य भक्त थे। वह हर मंगलवार और शनिवार को माता के दर्शन करने जरूर जाते थे। मंदिर पर मन्नत की पोटलियां बांधी जाती हैं। मनीष के घर में स्थित माता के मंदिर में भी दो लाल पोटलियां रखी मिली हैं। मनीष के तीन बच्चे, हंसता खेलता परिवार था, फिर क्या मन्नत थी, जिसकी पोटलियां उसने घर में रखी हुई थीं। यह सवाल भी खड़ा हो गया है।
खप्परपुर गांव के नजदीक ही शाहपुर हवेली गांव में माता का मंदिर है। इस मंदिर की स्थापना 10 साल पूर्व की गई थी। मंदिर के पुजारी मनीष महाराज उर्फ गर्गाचार्य के पिता करुआ बाबा ने बताया कि मनीष स्थापना से ही मंदिर से जुड़े हुए थे। उन्होंने निर्माण के दौरान श्रमदान किया था।
वह बहुत भले आदमी थे, यह कहते हुए करुआ बाबा रो पड़े। हालांकि लोगों का कहना है कि उन्होंने धन भी दिया था। तभी से वह देवी की उपासना करते थे। करीब तीन माह पहले मनीष को टाइफाइड हो गया था। गांव वालों ने बताया कि बीमारी से ठीक होने के बाद मनीष घर से कम ही बाहर निकलते थे।
मंदिर में मन्नतों को पूरी करने के लिए नारियल वाली पोटली बांधी
वह केवल मंदिर में पूजा करने के लिए मंगलवार व शनिवार को जाते थे। मान्यता है कि इस मंदिर में मन्नतों को पूरी करने के लिए नारियल वाली पोटली बांधी जाती हैं। मंदिर में लाल, पीली और सफेद पोटलियां बंधी हुई हैं।
सफेद पोटली पितरों के लिए, जबकि लाल पोटली मन्नत के लिए बांधी जाती है। इसी तरह की दो लाल पोटलियां मनीष के घर में बने मंदिर में भी रखी हुई मिलीं। अगर मनीष की कोई मन्नत थी तो वह इन पोटलियों को मंदिर में जाकर बांधते। इसको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर मनीष की ऐसी क्या मन्नत थी।
एक चिता पर दंपती को दी मुखाग्नि… अंतिम विदाई देने उमड़ी भीड़
मथुरा के खप्परपुर के एक ही परिवार के पांच सदस्यों के शव पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंचे तो करुण कंद्रन शुरू हो गया। खप्परपुर के अलावा आसपास के गांवों से भी सैकड़ों लोग यमुना किनारे ब्रह्मांड घाट के पास स्थित शमशान घाट पहुंचे।
देर रात दंपती को एक ही चिता पर मुखाग्नि दी गई तो वहीं तीनों बच्चों के शव दफनाए गए। इस दौरान पुलिस-प्रशासनिक अफसरों के साथ ही बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा।
पोस्टमार्टम के बाद रात साढ़े दस बजे मनीष, उनकी पत्नी सीमा और तीनों बच्चों के शव गांव पहुंचे तो हर आंख नम हो उठी। आसपास के सैकड़ों ग्रामीणों के पहुंचने पर पुलिस फोर्स के साथ शवों को महावन में शमशान घाट ले जाया गया।
यहां रात में ही लाइटिंग की व्यवस्था की गई। जेसीबी से बच्चों के शव दफनाने के लिए गड्ढे खुदवाए गए। इसके बाद दंपती को एक ही चिता पर भतीजे ऋषभ ने मुखाग्नि दी तो परिवारीजन बिलख उठे। सैकड़ों लोगों की भीड़ शमशान घाट भी पहुंच गई।
पुलिस को अंतिम संस्कार कराने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। देर रात सभी का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान एसडीएम, तहसीलदार, एसपी ट्रैफिक मनोज कुमार यादव, सीओ श्वेता वर्मा के साथ कई थानों का फोर्स मौजूद रहा।
एडीजी बोलीं, बहुत बुरा हुआ
खप्परपुर में हुई हृदय विदारक घटना को लेकर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी बेहद गंभीर हैं। सभी शवों के पोस्टमार्टम गृह पर आने के बाद पहुंचीं एडीजी अनुपम कुलश्रेष्ठ और मंडलायुक्त नागेंद्र प्रताप ने भी शवों को देखने की इच्छा जाहिर की। पोस्टमार्टम गृह के कर्मचारियों ने सभी के एक-एक कर शवों के चेहरों को दिखाए। उन्होंने देखकर कहा कि बहुत बुरा हुआ।
मंडलायुक्त भी पहुंचे पोस्टमार्टम गृह
आगरा से मंडलायुक्त नागेंद्र सिंह और एडीजी अनुपम कुलश्रेष्ठ, जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और श्लोक कुमार भी पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। एडीजी के द्वारा पूछे गए सवालों के पुलिसकर्मियों ने जवाब दिए। सभी अधिकारियों ने खप्परपुर से आए लोगों से बातचीत की। कई पहलुओं पर परिवार के बारे में पूछा। बच्चों की पढ़ाई, किसी से कोई दुश्मनी, कोई लेन देन का प्रकरण आदि बिंदुओं पर बात की।
मथुरा में किसान ने सुसाइड नोट छोड़ पत्नी, तीन बच्चों की हत्या कर दी जान
मथुरा के महावन तहसील के गांव खप्परपुर में दिल दहलाने वाली घटना हुई। किसान ने अपने तीन मासूम बच्चों और पत्नी की हत्या करने के बाद खुद को करंट लगाकर खुदकुशी कर ली। दीवार पर सुसाइड नोट लिखा मिला है, हम अपनी मर्जी से जान दे रहे हैं, किसी को परेशान नहीं किया जाए।
घटना से पहले डायरी और वीडियो में भी सुसाइड नोट मिला है। एडीजी अनुपम कुलश्रेष्ठ, डीआईजी शैलेष पांडेय, डीएम, एसएसपी ने घटनास्थल पर पहुंचकर जानकारी ली। घटना के पीछे मानसिक अवसाद सहित अन्य पहलुओं पर जांच की जा रही है।
मनीष की 8 साल पहले सीमा से हुई शादी
खप्परपुर गांव में अनुसूचित जाति के दिवंगत किसान रामकिशन के तीन बेटों में मंझले बेटे मनीष (35) अपनी पत्नी सीमा (30), तीन बच्चों प्रियांशी (6), हनी (5) और ढाई साल के प्रतीक के साथ गांव में ही रहते थे। मनीष की 8 साल पहले हाथरस के गांव मढ़नई निवासी सीमा से शादी हुई थी।
मनीष और दोनों भाई सुधीर व बंटी उर्फ जयकिशन के घर भी आसपास हैं। मां श्यामवती (70) दूसरे भाइयों के साथ रहती हैं। तीनों भाई अलग-अलग खेतीबाड़ी है। एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि मंगलवार सुबह 9 बजे तक मनीष के बच्चे घर के बाहर दिखाई नहीं दिए।
बेड पर पड़े थे तीन शव
इस पर बड़े भाई सुधीर ने मनीष के घर का दरवाजा खटखटाया मगर काफी देर तक जवाब नहीं मिला। दीवार फांदकर अंदर घुसे, अनहोनी की आशंका पर उन्होंने आसपास के लोगों को बुलाकर दरवाजा तोड़कर देखा तो मनीष का शव जमीन पर पड़ा था, जबकि सीमा, हनी और बेटे के शव डबल बेड पर पड़े थे।
बेड पर ही मिला लोहे का मूसल
प्रियांशी का शव चारपाई पर था। यह देखकर चीखपुकार मच गई। कुछ ही देर में सैकड़ों लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई। बेड पर ही पुलिस को लोहे का मूसल मिला। पास में रस्सी पड़ी थी।
हम अपनी मर्जी से जान दे रहे हैं’
कमरे की दीवार पर लिखा मिला कि ‘हम अपनी मर्जी से जान दे रहे हैं, किसी को परेशान नहीं किया जाए।’ इसी तरह पॉकेट डायरी के पन्नों पर लिखा था कि ‘मैं मनीष और सीमा अपनी मर्जी से मरे हैं।
पुलिस किसी को परेशान नहीं करे-मनीष।’ दूसरे पन्ने पर लिखा था ‘सतीश विरामपुर वाले पर प्लॉट के पैसे हैं उसके जीजा लक्ष्मण प्रसाद (गोवर्धन) वाले पर। 126000 आए, 7 लाख और हैं।’ इसी तरह डायरी में भी तीन पन्नों का सुसाइड नोट मिला है।
हाथ में बिजली का तार लेकर की खुदकुशी
मनीष ने घटना से पहले वीडियो भी बनाया है, इसमें भी उन्होंने अपनी मर्जी से जान देने की बात कही हैं। हम अपने दुखों से दुखी हैं। किसी को परेशान नहीं किया जाए। एसएसपी ने बताया कि मनीष ने पत्नी की गला दबाकर और मूसल से प्रहार करके और बच्चों का गला दबाकर हत्या की हैं। फिर हाथ में बिजली का तार लेकर खुदकुशी की है।