राखीगढी में खोदाई में निकले पत्थर के मनके: मछली और कछुए के अवशेष, तीन टीलों पर अलग-अलग टीमें जुटीं

Picture of PRIYA NEWSINDIA

PRIYA NEWSINDIA

SHARE:

राखीगढ़ी हड़प्पाकालीन सभ्यता का सबसे बड़ा पुरातात्विक स्थल है। राखी शाहपुर और राखीखास के बीच 11 टीलों में बंटा यह पुरातात्विक स्थल 500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला है।
Stone beads unearthed during excavations at Rakhigarhi remains of fish and turtles found

ऐतिहासिक स्थल राखीगढ़ी में चौथे चरण की खोदाई में कई ऐसे पुरातात्विक अवशेष मिले हैं जिनसे यहां रहे लोगों की आभूषणों और खान-पान संबधी रुचि के बारे में पता चलता है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग की टीम 22 जनवरी से टीला नंबर एक, दो और तीन पर खोदाई कर रही है। अब तक की खोदाई में हड़प्पा संस्कृति से जुड़ीं वस्तुएं मिलीं हैं। सबसे बड़ी टीम टीला नंबर दो पर परत दर परत खोदाई कर रही है। यहां मिले मनके कार्नियन (भूरे-लाल या नारंगी रंग का अर्ध-कीमती रत्न), सेलखड़ी और चर्ट जैसे पत्थरों के हिस्सों से अनुमान लगाया जा रहा है कि हड़प्पाकालीन लोग इन्हें आभूषणों के रूप में पहनते होंगे।

टीला नंबर दो से कछुए और मछली के अवशेष मिले हैं। इससे प्रतीत होता है कि नदी में बहकर आए ये जीव यहां रहने वाले लोगों के खान-पान का हिस्सा रहे होंगे। सभी अवशेषों को संभालकर रखा गया है और खोदाई के बाद मिट्टी छानी जा रही है ताकि इन्हें अनुसंधान के लिए सहेज कर रखा जा सके। तीनों टीलों पर अलग-अलग टीमें खोदाई में जुटी हैं।

वैदिक परंपरा के अनुयायी थे राखीगढ़ी के लोग
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. शुभम केवलिया ने बताया कि पहले किए गए उत्खनन में यज्ञ वेदियां और घोड़े की मृण्मूर्ति प्राप्त हुई थीं। खोदाई में मिले कंकाल के डीएनए अध्ययन से पता चला कि यहां रहने वाले लोग भारत के मूल निवासी थे। इन अवशेषों से यह भी स्पष्ट होता है कि राखीगढ़ी के लोग वैदिक परंपरा के अनुयायी थे और आर्य आगमन के मिथक को चुनौती मिलती है।

11 टीलों में बंटा पुरातात्विक स्थल 500 हेक्टेयर से अधिक में फैला
राखीगढ़ी हड़प्पाकालीन सभ्यता का सबसे बड़ा पुरातात्विक स्थल है। राखी शाहपुर और राखीखास के बीच 11 टीलों में बंटा यह पुरातात्विक स्थल 500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला है। वर्ष 1969 में प्रोफेसर सूरज भान की ओर से किए गए अन्वेषण से यह पता चला कि राखीगढ़ी के पुरातात्विक अवशेष और बस्तियां हड़प्पाकालीन संस्कृति के प्रतीक हैं।

चौथे चरण की खोदाई में अब तक क्या-क्या निकला 

  • टीला नंबर दो से चूल्हा, कच्ची और पक्की ईंटे, सुराही के टुकड़े, सजी हुई सुराही के टुकड़े
  • टीला नंबर तीन से किसी जानवर की हड्डियां।

खोदाई स्थल का ब्योरा

  • टीला नंबर एक: यह करीब 14 मीटर ऊंचा है।
  • टीला नंबर दो: यह 10 मीटर ऊंचा है।
  • टीला नंबर तीन: 12 मीटर ऊंचा है।
PRIYA NEWSINDIA
Author: PRIYA NEWSINDIA